Post Views: 28
लोकायुक्त का ‘ट्रैक रिकॉर्ड’: 9 माह में तीसरी कार्रवाई, महिला बाल विकास विभाग पर नियंत्रण के सवाल

खालवा में 4 हजार रिश्वत लेते सुपरवाइजर गिरफ्तार—मंगल दिवस, पोषण पखवाड़ा, नियुक्तियों तक ‘वसूली’ के आरोप

खंडवा/चर्चा न्यूज़ विशेष
(संपादक सुशील विधाणी )
खंडवा महिला एवं बाल विकास विभाग, जिसका मूल उद्देश्य कुपोषण को समाप्त करना और महिलाओं-बच्चों के कल्याण को सुनिश्चित करना है, अब लगातार सामने आ रही लोकायुक्त कार्रवाइयों और शिकायतों के कारण गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। बीते 8–9 महीनों में तीसरी बार लोकायुक्त इंदौर की टीम ने जिले में कार्रवाई की है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर कमी बनी हुई है।
https://youtu.be/8WXFI_N6aoU?si=GntftIPh21IUOG8j
खालवा में रंगे हाथ कार्रवाई—एक और मामला उजागर
ताजा मामले में खालवा परियोजना में पदस्थ आंगनवाड़ी सुपरवाइजर संतोष कोचले को लोकायुक्त टीम ने 4 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। कार्रवाई हरसूद में उस समय की गई जब आरोपी ने कथित रूप से एक मीटिंग के दौरान ही फरियादी को राशि लेकर आने के लिए बुलाया था। यह घटना इस बात का संकेत है कि शिकायतें केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर वास्तविक घटनाएं सामने आ रही हैं।
9 महीनों में तीसरी कार्रवाई—फिर भी सुधार नहीं
गौरतलब है कि पिछले 8–9 महीनों में यह तीसरी लोकायुक्त कार्रवाई है। आमतौर पर ऐसी कार्रवाइयां किसी भी विभाग के लिए चेतावनी मानी जाती हैं, लेकिन यहां स्थिति उलट नजर आ रही है। बार-बार कार्रवाई के बावजूद न तो कार्यप्रणाली में सुधार दिखाई दे रहा है और न ही जवाबदेही तय होती दिख रही है।

मंगल दिवस और पोषण पखवाड़ा भी विवादों में
मंगल दिवस और पोषण पखवाड़ा जैसे कार्यक्रम, जो जमीनी स्तर पर पोषण सुधार और जागरूकता के लिए बनाए गए हैं, अब आरोपों के दायरे में आ गए हैं। जानकारी के अनुसार, मंगल दिवस के लिए प्रति केंद्र लगभग rs3500/- की राशि स्वीकृत होती है, लेकिन उसमें से rs 2000/-तक वापस मांगे जाने की शिकायतें सामने आई हैं। यह प्रवृत्ति खंडवा शहरी क्षेत्र से शुरू होकर अन्य क्षेत्रों में भी देखने को मिल रही है।
प्रमोशन और नियुक्तियों में भी लेन-देन के आरोप
विभाग में केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक ही नहीं, बल्कि प्रमोशन, नई नियुक्ति और प्रभार देने जैसे मामलों में भी पैसों के लेन-देन के आरोप लग रहे हैं। यदि इन आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह केवल प्रशासनिक कमजोरी नहीं बल्कि एक गहरी संस्थागत समस्या की ओर संकेत करता है।
शिकायतें लगातार, लेकिन कार्रवाई सीमित
सूत्रों के अनुसार, विभाग में लंबे समय से कई शिकायतें दर्ज हो रही हैं, लेकिन उन पर समयबद्ध और कठोर कार्रवाई का अभाव देखने को मिला है। यही कारण है कि निचले स्तर पर अनुशासन कमजोर पड़ता नजर आता है और गलत प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिलता है।
प्रशासनिक नियंत्रण पर उठते प्रश्न
जिला स्तर पर वर्तमान प्रशासनिक नेतृत्व के कार्यकाल में इन मामलों की आवृत्ति बढ़ने से निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर भी प्रश्न उठ रहे हैं। हालांकि, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए निष्पक्ष जांच आवश्यक है, लेकिन लगातार सामने आ रहे प्रकरण यह जरूर दर्शाते हैं कि नियंत्रण और पर्यवेक्षण को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
योजनाओं की विश्वसनीयता पर असर
जब पोषण पखवाड़ा और मंगल दिवस जैसे कार्यक्रमों पर सवाल उठते हैं, तो इसका सीधा असर योजनाओं की विश्वसनीयता पर पड़ता है। लाभार्थियों तक सेवाएं पहुंचाने के बजाय यदि प्रक्रियाओं पर ही प्रश्न खड़े हो जाएं, तो विभाग की छवि प्रभावित होना स्वाभाविक है।
प्रशासन के सामने चुनौती और अपेक्षा
वर्तमान परिस्थितियों में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। इसके लिए आवश्यक है कि शिकायतों का त्वरित निराकरण हो, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
निष्कर्ष
लगातार हो रही लोकायुक्त कार्रवाई और बढ़ती शिकायतें यह स्पष्ट संकेत दे रही हैं कि महिला एवं बाल विकास विभाग में सुधार की तत्काल आवश्यकता है। योजनाओं का उद्देश्य तभी पूरा हो सकेगा जब जमीनी स्तर पर ईमानदारी, पारदर्शिता और सख्त प्रशासनिक नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए। फिलहाल, खंडवा में सामने आ रही घटनाएं इसी दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग कर रही हैं।