ओंकारेश्वर में पार्किंग व्यवस्था में अनियमितताओं के आरोप
ठेका समाप्ति के बाद रसीद प्रबंधन, वसूली और नीलामी प्रक्रिया पर उठे प्रश्न

खंडवा/ओंकारेश्वर।
धार्मिक नगरी ओंकारेश्वर में पार्किंग व्यवस्था को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ठेका समाप्ति के बाद रसीद कट्टों के संधारण, श्रद्धालुओं से वसूली की शिकायतों एवं हाल ही में हुई नीलामी प्रक्रिया ने प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए लगभग 2 करोड़ 15 लाख रुपए में दिया गया पार्किंग ठेका 31 मार्च को समाप्त हुआ। नियमानुसार ठेका समाप्ति के पश्चात सभी रसीद कट्टों को नगर परिषद कार्यालय में जमा किया जाना आवश्यक था, किंतु आरोप है कि संबंधित रसीदें व्यवस्थित रूप से जमा नहीं की गईं। जानकारी के अनुसार, रसीदों को सड़कों पर फेंक दिया गया, जिन्हें बाद में सफाई कर्मचारियों द्वारा कचरे के रूप में उठाया गया। यह स्थिति राजस्व अभिलेखों की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
इसी क्रम में श्रद्धालुओं से पार्किंग शुल्क को लेकर भी लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोपों में निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली, रसीद उपलब्ध न कराना तथा विवाद की स्थिति में अभद्र व्यवहार जैसी बातें शामिल हैं। कुछ मामलों में वाहन क्षति एवं विवाद की स्थिति बनने की जानकारी भी प्राप्त हुई है, जिनकी पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी।
हाल ही में संपन्न पार्किंग नीलामी प्रक्रिया भी चर्चा में रही। प्राप्त जानकारी के अनुसार, नीलामी की बोली लगभग 5 करोड़ 29 लाख 50 हजार रुपए तक पहुंची। इस दौरान कुछ प्रतिभागियों के बीच अनौपचारिक सहमति (समझौता) की स्थिति बनने की बात सामने आई, किंतु सहमति न बनने के कारण संबंधित पक्षों की अमानत राशि (लगभग 5-5 लाख रुपए) जब्त हो गई। यद्यपि इन तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि अपेक्षित है, तथापि इससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्न उठे हैं।
नगर पंचायत द्वारा वर्तमान स्थिति को देखते हुए अमानत राशि बढ़ाकर 25 लाख रुपए कर दी गई है, जिससे केवल गंभीर बोलीदाता ही प्रक्रिया में सम्मिलित हो सकें। अगली नीलामी 15 अप्रैल को प्रस्तावित है।
प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मामले को संज्ञान में लेकर जांच किए जाने की बात कही गई है। तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया है।
वर्तमान परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए आवश्यक है कि संपूर्ण प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर राजस्व अभिलेखों का सत्यापन किया जाए तथा पार्किंग व्यवस्था को पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित बनाया जाए, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और प्रशासनिक व्यवस्था पर जनविश्वास बना रहे।















