रूममेट पास में सोता रहा, न आवाज सुनाई दी न हलचल… 50 प्रवेशित छात्रों में घटना की रात 28 ही मौजूद — अब जांच बताएगी कि आखिर रात में हुआ क्या?

खंडवा/Sushil vidhani
छैगांवमाखन। आदिवासी छात्रावास में 11वीं के छात्र पूनमचंद की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे मामले को ‘चर्चा’ में ला दिया है। घटना जितनी गंभीर है, उससे कहीं ज्यादा गंभीर अब वे सवाल हैं, जिनके जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।
सिरसोद रोड स्थित आदिवासी छात्रावास में रहने वाले 18 वर्षीय पूनमचंद का शव मंगलवार सुबह उसके कमरे में फंदे पर लटका मिला। रात में कमरे में उसका रूममेट भी मौजूद था। दोनों अलग-अलग पलंग पर सोए थे। रूममेट का कहना है कि रात में उसे न कोई आवाज सुनाई दी और न किसी तरह की हलचल का पता चला। सुबह उठकर देखा तो पूनमचंद फंदे पर लटका मिला।
अब यही बात सबसे बड़ी ‘चर्चा’ बन गई है—जब कमरा एक, पलंग दो और रात में दोनों छात्र मौजूद थे, तो आखिर वह रात इतनी खामोश कैसे रही कि किसी को कुछ पता ही नहीं चला? सवाल जरूर है, लेकिन जवाब जांच के बाद ही मिलेगा।
50 छात्र कागज पर, रात में 28 मैदान में!
मामले में एक और जानकारी सामने आई है। आदिम जाति कल्याण विभाग अधिकारी डॉ. नारायण सिंह के अनुसार छात्रावास में कुल 50 छात्र प्रवेशित हैं, लेकिन घटना वाली रात केवल 28 छात्र ही छात्रावास में मौजूद थे।
अब यहां भी ‘चर्चा’ बनती है—प्रवेशित 50, मौजूद 28… बाकी 22 कहां थे? यह कोई आरोप नहीं, लेकिन घटना की गंभीरता को देखते हुए यह भी जांच का हिस्सा होना चाहिए कि उस रात कौन छात्रावास में था, कौन नहीं था और उपस्थिति का रिकॉर्ड क्या कहता है।
परिजन बोले- जांच हो, एनएसयूआई ने भी उठाए सवाल
घटना के बाद मृतक छात्र के परिजन छात्रावास के बाहर बैठकर न्याय की मांग करने लगे। परिजनों ने छात्रावास प्रबंधन और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
एनएसयूआई ने भी प्रशासन से सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कराने, उपस्थिति रजिस्टर की जांच, अधीक्षक एवं कर्मचारियों की भूमिका की जांच और परिजनों की शंकाओं का समाधान करने की मांग की है।
एनएसयूआई जिला अध्यक्ष चंदन सिंह पवार ने कहा कि जांच ऐसी हो जिसमें न किसी निर्दोष को परेशान किया जाए और न किसी दोषी को बचाया जाए।
नया छात्रावास, पुराना सवाल—निगरानी कहां थी?
खास बात यह है कि जिस छात्रावास में यह घटना हुई, उसका उद्घाटन पिछले महीने ही हुआ था। ऐसे में अब चर्चा केवल एक छात्र की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रावास की निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था, रात्रिकालीन उपस्थिति और जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका पर भी हो रही है।
सवाल यह नहीं कि छात्रावास नया है या पुराना। सवाल यह है कि वहां रहने वाले बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है?
अधिकारी बोले- संभाग आयुक्त के साथ निरीक्षण कर रहे
आदिम जाति कल्याण विभाग अधिकारी डॉ. नारायण सिंह ने कहा कि छात्र की मौत का कारण अभी पता नहीं चल पाया है। वे संभाग आयुक्त के साथ छात्रावास का निरीक्षण करने के लिए निकले हैं। छात्रावास की व्यवस्थाओं, विद्यार्थियों की उपस्थिति और घटना से जुड़े अन्य बिंदुओं की जानकारी ली जा रही है।
उन्होंने कहा कि जल्द ही मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास किया जाएगा।
अब ‘चर्चा’ सिर्फ चर्चा न रहे, जवाब भी आएं
फिलहाल पुलिस और फॉरेंसिक टीम जांच में जुटी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल के साक्ष्य, सीसीटीवी, उपस्थिति रजिस्टर और छात्रों एवं कर्मचारियों के बयान से घटनाक्रम की तस्वीर साफ हो सकती है।
क्योंकि इस मामले में चर्चा बहुत हैं—रात की खामोशी की, 28 छात्रों की मौजूदगी की, बाकी छात्रों की गैरमौजूदगी की और निगरानी व्यवस्था की। अब जरूरत इस बात की है कि चर्चा से आगे बढ़कर जांच के जरिए सच सामने आए।
चर्चा न्यूज की चर्चा यहीं खत्म नहीं होती—सवाल वही है, आखिर उस रात छात्रावास में हुआ क्या था? जवाब जांच देगी।
















