भोपाल के ‘असलम चमड़ा’ की तर्ज पर खंडवा में ‘अनवर चमड़ा’ का खुलासा

बेगम पार्क में घर के भीतर चलता रहा काला कारोबार, अब बड़ी धाराओं पर टिकी नजरें

खंडवा/चर्चा न्यूज़
( सुशील विधाणी)
नगर पालिक निगम, जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने शहर के मोघट रोड थाना क्षेत्र अंतर्गत बेगम पार्क में अवैध रूप से पशुओं की चमड़ी, चर्बी और अन्य अवशेषों के भंडारण व व्यापार का बड़ा भंडाफोड़ किया है। मामले में आरोपी शेख अनवर शेख बिसमिल्ला कुरेशी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के बाद जेल भेज दिया गया है।
भोपाल के असलम चमड़े की तर्ज पर खंडवा में भी सुर्खियों में अनवर कुरैशी का ‘चमड़ा कारोबार’
नगर निगम के प्रभारी जोन अधिकारी जाकिर अहमद द्वारा 24 अप्रैल को थाना मोघट रोड में लिखित शिकायत दी गई थी, जिसमें आरोपी पर अवैध रूप से पशु अवशेषों—चर्बी, खाल, सींग आदि का भंडारण व व्यापार करने का आरोप लगाया गया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 133/2026 के तहत मध्यप्रदेश कृषिक पशु परिरक्षण अधिनियम, 1959 की धारा 7 एवं भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 292 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
सूचना मिलते ही सिटी मजिस्ट्रेट, नगर पुलिस अधीक्षक, तहसीलदार, नगर निगम के अधिकारियों और मोघट रोड थाना प्रभारी की संयुक्त टीम ने बेगम पार्क स्थित आरोपी के मकान/गोदाम पर छापा मारा। निरीक्षण में सामने आया कि एक रिहायशी मकान के भीतर ही अवैध रूप से जानवरों की चर्बी गलाने, खाल जमा करने और अन्य अवशेषों का प्रसंस्करण किया जा रहा था।
जांच के दौरान आरोपी द्वारा प्रस्तुत नगर निगम का लाइसेंस किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर पाया गया और उसकी वैधता वर्ष 2023 में समाप्त हो चुकी थी। इसके बावजूद अवैध कारोबार जारी रहा, जो प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। मौके पर पशु चिकित्सक द्वारा सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं।

कार्रवाई के दौरान टीम ने आरोपी के गोदाम से भारी मात्रा में सामग्री जब्त की, जिसमें 69 टीन चर्बी, 9 ड्रम अज्ञात केमिकल, लगभग 600 चमड़े, 35 बोरी पशुओं के सींग और 6 बोरी पशुओं की नलियां शामिल हैं।
25 अप्रैल को कलेक्टर ऋषभ गुप्ता, पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार राय, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेंद्र तारणेकर, नगर पुलिस अधीक्षक अभिनव बारंगे एवं नगर निगम आयुक्त प्रियंका रजावत ने मौके का निरीक्षण किया और जांच के निर्देश दिए। पुलिस अधीक्षक के अनुसार सैंपल रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

आरोपी शेख अनवर कुरेशी (उम्र 50 वर्ष), निवासी बेगम पार्क, को थाना मोघट रोड पुलिस द्वारा प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां से जेल वारंट जारी होने पर उसे जिला जेल खंडवा भेज दिया गया।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर खंडवा को पुराने मामलों की याद दिला दी है। इमलीपुरा क्षेत्र में करीब 11 वर्ष पूर्व गौहत्या और अवैध कटाई पर बड़ी कार्रवाई, और पेठिया ग्राम में मिड-डे मील में चर्बी युक्त पुलाव का खुलासा—दोनों मामलों ने उस समय सुर्खियां बटोरी थीं। अब बेगम पार्क का मामला उसी कड़ी को आगे बढ़ाता नजर आ रहा है।
खाद्य विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में एक और पहलू चर्चा में है—खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली। स्थानीय स्तर पर यह बात सामने आ रही है कि संबंधित खाद्य विभाग के अधिकारी लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं। छापे के दौरान सैंपल लेने की प्रक्रिया में उनके व्यवहार को लेकर भी सवाल उठे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मौके पर सैंपल लेने को लेकर अनावश्यक आनाकानी और सिटी मजिस्ट्रेट के साथ तर्क-वितर्क जैसी स्थिति बनी।
ऐसे में यह सवाल खड़ा होना स्वाभाविक है कि क्या यह मामला पहले से जानकारी में होने के बावजूद नजरअंदाज किया गया? क्या सैंपल लेने में देरी महज प्रक्रिया का हिस्सा थी या कुछ और? हालांकि इन बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही संभव है, लेकिन घटनाक्रम ने संदेह की स्थिति जरूर पैदा कर दी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
जिस प्रकार भोपाल में “असलम चमड़ा” मामला चर्चा में रहा, उसी तर्ज पर अब “अनवर कुरेशी चमड़ा” खंडवा में सुर्खियां बटोर रहा है। एक रिहायशी इलाके में इस स्तर का अवैध कारोबार संचालित होना यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं सिस्टम की निगरानी कमजोर रही या नजरें जानबूझकर फेर ली गईं।
कानूनी दृष्टि से देखें तो फिलहाल दर्ज धाराएं प्रारंभिक हैं, लेकिन जिस प्रकार की बरामदगी और परिस्थितियां सामने आई हैं, उसके आधार पर मामले में कड़ी धाराएं जोड़ी जाना आवश्यक माना जा रहा है। इसमें पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, जनस्वास्थ्य को खतरा पहुंचाने वाली भारतीय न्याय संहिता की धाराएं (270/271), पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986, खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 तथा फर्जी लाइसेंस और धोखाधड़ी से संबंधित BNS की सख्त धाराएं (318, 336, 340) लागू हो सकती हैं।
यही वह बिंदु है जहां यह मामला सिर्फ एक कार्रवाई नहीं, बल्कि एक परीक्षा बन जाता है—प्रशासन की, कानून की और नीयत की।
चर्चा न्यूज़ विशेष…..















