घरेलू सिलेंडर से चल रहे ढाबे-होटल!
रंगों से पहचानिए गैस सिलेंडर, गलत उपयोग पर आवश्यक वस्तु अधिनियम में सख्त कार्रवाई संभव

चर्चा न्यूज़ विशेष
खंडवा। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में गैस सिलेंडरों के उपयोग को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। जानकारी के अभाव में कई जगहों पर घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग व्यावसायिक कार्यों में किए जाने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। ऐसे मामलों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी चिंता जताई जाती रही है, क्योंकि सिलेंडरों का गलत उपयोग सुरक्षा के लिहाज से भी जोखिम भरा होता है और यह कानून का उल्लंघन भी माना जाता है।


हाल ही में पंधाना क्षेत्र में प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई में एक होटल-कैंटीन में बड़ी संख्या में एलपीजी सिलेंडर जब्त किए जाने की घटना भी चर्चा में रही, जिसके बाद गैस सिलेंडरों के उपयोग को लेकर नियमों और उनकी पहचान पर फिर से सवाल उठने लगे हैं। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यदि सिलेंडरों का उपयोग निर्धारित नियमों के अनुसार नहीं किया जाता तो ऐसी कार्रवाई आगे भी जारी रह सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार गैस सिलेंडरों के अलग-अलग रंग केवल पहचान के लिए नहीं बल्कि उनके उपयोग को स्पष्ट करने के लिए तय किए गए हैं, ताकि यह आसानी से समझा जा सके कि किस सिलेंडर में कौन-सी गैस है और उसका उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जाना है।
जानकारी के अनुसार लाल रंग का सिलेंडर एलपीजी (Liquefied Petroleum Gas) का होता है, जो घरेलू उपयोग के लिए निर्धारित है। देशभर के अधिकांश घरों में खाना पकाने के लिए इसी सिलेंडर का उपयोग किया जाता है। वहीं पीले रंग का सिलेंडर भी एलपीजी गैस से भरा होता है, लेकिन यह व्यावसायिक उपयोग के लिए होता है। होटल, ढाबे, रेस्टोरेंट और बड़े किचन में गैस की अधिक खपत होने के कारण इस सिलेंडर का उपयोग किया जाता है।
इसी तरह काले रंग का सिलेंडर औद्योगिक गैसों के लिए उपयोग में आता है। फैक्ट्रियों, वेल्डिंग कार्य और कई औद्योगिक प्रक्रियाओं में इसका इस्तेमाल किया जाता है। सफेद रंग का सिलेंडर आमतौर पर ऑक्सीजन गैस के लिए होता है, जिसका उपयोग अस्पतालों में मरीजों को सांस लेने में सहायता देने के लिए किया जाता है।

इसके अलावा हरे रंग के सिलेंडर का उपयोग सीएनजी या अन्य मेडिकल गैसों के लिए किया जाता है, जिनका उपयोग अस्पतालों, प्रयोगशालाओं और वैज्ञानिक प्रयोगों में होता है। वहीं नीले रंग का सिलेंडर नाइट्रस ऑक्साइड गैस के लिए होता है, जिसे “लाफिंग गैस” भी कहा जाता है और इसका उपयोग अस्पतालों तथा दंत चिकित्सा में दर्द कम करने के लिए किया जाता है।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कई बार घरेलू उपयोग के लिए मिलने वाले एलपीजी सिलेंडरों का उपयोग होटल-ढाबों या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में किया जाता है। यह नियमों का उल्लंघन माना जाता है। इसके अलावा गैस सिलेंडरों का अवैध भंडारण, बिना अनुमति बिक्री या सुरक्षा नियमों की अनदेखी भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है।
ऐसे मामलों में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3 और 7, एलपीजी (रेगुलेशन ऑफ सप्लाई एंड डिस्ट्रीब्यूशन) आदेश तथा गैस सिलेंडर नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। दोषी पाए जाने पर गैस सिलेंडर और गैस स्टॉक जब्त किए जाने के साथ ही संबंधित व्यक्ति या प्रतिष्ठान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा जुर्माना, लाइसेंस निरस्तीकरण और जेल तक की सजा का प्रावधान भी है।
पंधाना में हुई हालिया कार्रवाई के बाद प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि यदि जिले में व्यापक जांच अभियान चलाया गया तो कई ऐसे प्रतिष्ठान सामने आ सकते हैं जहां घरेलू गैस का उपयोग व्यावसायिक कार्यों में किया जा रहा है। ऐसे में नियमों के पालन को लेकर जिम्मेदार विभाग की संभावित सख्ती को लेकर बाजार और व्यापारिक क्षेत्रों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।कार्रवाई में राजस्व और पुलिस बल रहा मौजूद
कार्रवाई के दौरान पंधाना तहसीलदार दिवाकर सुल्या, नायब तहसीलदार वैशाली बघेल और खाद्य विभाग के कर्मचारी प्रदीप वर्मा मौके पर मौजूद रहे। इनके साथ पंधाना पटवारी अजय रघुवंशी, बोरगांव पटवारी अनमोल सोनी सहित पुलिस बल भी कार्रवाई में शामिल रहा।
प्रशासन का कहना है कि घरेलू गैस सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध भंडारण के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा, ताकि आम उपभोक्ताओं को गैस की निरंतर और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
















