खंडवा विधायक कंचन मुकेश तंवे,
पंधाना विधायक छाया मौरे के संग,
महापौर अमृता अमर यादव ने बढ़ाया रंगों का उमंग।
हर्बल गुलाल की खुशबू संग जब की मेले की शुरुआत,
खरीदी कर दिया संदेश—प्रकृति संग मनाएं होली हर बार।

प्रशासनिक नवाचार, जनप्रतिनिधियों की खरीदी और नागरिकों की भागीदारी से बदला त्योहार का स्वरूप

चर्चा न्यूज़ विशेष
खंडवा। इस बार होली का पर्व केवल रंगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे जिले में एक सकारात्मक बदलाव और नवाचार की चर्चा छेड़ गया है। 200 से अधिक स्थानों पर होलिका दहन की तैयारियों के बीच नगर निगम चौराहे पर सजा हर्बल होली मेला शहर में आकर्षण और संवाद का केंद्र बना हुआ है।
मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से आयोजित इस मेले में स्वयं सहायता समूहों एवं जनजीवन सहायता समूह की महिलाओं ने प्राकृतिक रंगों की ऐसी श्रृंखला प्रस्तुत की, जिसकी खुशबू और गुणवत्ता दोनों ही चर्चा में हैं। पलाश, गुलाब और अन्य फूलों से बने गुलाल, मेहंदी और मोरिंगा पाउडर से तैयार रंग न केवल त्वचा के लिए सुरक्षित हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रहे हैं।


कलेक्टर की पहल से नवाचार की शुरुआत
खंडवा कलेक्टर ऋषभ गुप्ता की यह पहली अभिनव पहल मानी जा रही है, जिसमें जिला प्रशासन ने होली को “हर्बल और हरित” स्वरूप देने का संकल्प लिया। जिला पंचायत सीईओ नागार्जुन बी गौडा सहित प्रशासनिक अमले की सक्रिय भागीदारी से यह आयोजन आकार ले सका।
होलिका दहन के लिए गाय के गोबर से बनी लकड़ियों और कंडों की उपलब्धता ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। पेड़ों की कटाई रोकने और प्रदूषण कम करने की दिशा में यह प्रयास सराहनीय माना जा रहा है।
जनप्रतिनिधियों की सहभागिता बनी प्रचार का माध्यम
खंडवा महापौर अमृता अमर यादव, पंधाना विधायक छाया मोर, खंडवा विधायक तथा भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मेले में पहुंचकर स्टालों से खरीदी की। उनकी उपस्थिति और खरीदी ने आम नागरिकों के बीच हर्बल रंगों के प्रति विश्वास बढ़ाया।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की संयुक्त मौजूदगी ने इस आयोजन को चर्चा का मुख्य विषय बना दिया है। शहर में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि हर त्योहार को इसी तरह पर्यावरण और जनसहभागिता से जोड़ा जाए, तो बदलाव की दिशा और मजबूत हो सकती है।

नागरिकों का उत्साह और महिलाओं का सशक्तिकरण
मेले में बड़ी संख्या में नागरिकों ने पहुंचकर प्राकृतिक रंगों की खरीदी की। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए यह अवसर आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बना है। उनकी मेहनत से तैयार उत्पादों की मांग बढ़ने से आत्मनिर्भरता की दिशा में नई उम्मीद जगी है।
चर्चा से बदलाव तक
खंडवा में इस बार की होली केवल उत्सव नहीं, बल्कि एक विचार बनकर उभरी है—प्रकृति के साथ संतुलन, महिलाओं का सशक्तिकरण और प्रशासनिक नवाचार। शहर में हर्बल रंगों की खुशबू के साथ यह चर्चा भी फैल रही है कि त्योहारों को जिम्मेदारी और जागरूकता के साथ कैसे मनाया जाए।
फिलहाल नगर निगम चौराहे से लेकर मोहल्लों तक एक ही चर्चा है—इस बार की होली रंगों से ज्यादा नवाचार और पर्यावरण की चिंता के नाम रही। और यही चर्चा अब पूरे शहर में हो रही है।















