खंडवा में बस ऑपरेटरों ने कलेक्टर व आरटीओ को सौंपा ज्ञापन, 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी


नई परिवहन नीति पर प्रदेशभर में विरोध की आहट
चर्चा न्यूज़ /सुशील विधाणी
खंडवा। मध्यप्रदेश शासन की नई परिवहन नीति के विरोध में प्रदेशभर के बस ऑपरेटर एकजुट होते दिखाई दे रहे हैं। 22 फरवरी को सागर में आयोजित प्रदेश स्तरीय बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार यदि शासन ने नीति में संशोधन नहीं किया तो 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी। इसी क्रम में खंडवा बस यूनियन के सदस्यों ने कलेक्टर ऋषव गुप्ता तथा खंडवा आरटीओ से भेंट कर विस्तृत ज्ञापन सौंपा और मुख्यमंत्री तक अपनी मांगें पहुंचाने का आग्रह किया।
ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि नई परिवहन नीति वर्तमान में संचालित व्यवस्था को अस्थिर कर सकती है और छोटे मोटर मालिकों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।
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“रूट वही, बस वही… लेकिन परमिट बदलेंगे”
खंडवा बस ऑपरेटर यूनियन के उपाध्यक्ष सुनील आर्य ने बताया कि प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार बेस (डिपो) वही रहेगा, रूट वही रहेंगे और वर्तमान में संचालित बसें भी वही रहेंगी। अंतर केवल इतना होगा कि पुराने परमिट निरस्त कर शासन मोटर एक्ट के नए प्रावधानों के तहत बीट (टेंडर) प्रणाली से नए परमिट जारी करेगा।
यूनियन का कहना है कि इस प्रक्रिया में “मलकाना हक” शासन अपने हाथ में लेकर बोली आधारित आवंटन करेगा। जो ऑपरेटर अधिक बोली लगाएगा, संबंधित रूट उसे मिल जाएगा। इससे वर्षों से एक ही मार्ग पर सेवा दे रहे छोटे और मध्यम मोटर मालिकों के समक्ष आर्थिक संकट और बेरोजगारी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
बस ऑपरेटरों ने इसे व्यंग्यात्मक रूप से “धन उगलो ऑपरेटर योजना” जैसा बताया है—अर्थात जो जितनी अधिक राशि लगाएगा, वही सेवा संचालित करेगा। चर्चा में यह तुलना भी सामने आई कि जैसे जीएसटी व्यवस्था में एक वस्तु पर अलग-अलग चरणों में कर लगने की शिकायतें उठती रही हैं, वैसे ही इस नीति में प्रतीत होता है मानो वर्षों से संचालित अपने ही रूट पर फिर से बोली लगाकर उसे “खरीदना” पड़े।
“सरकार स्वयं बस चलाए तो स्वागत है”
यूनियन ने स्पष्ट किया है कि यदि मध्यप्रदेश शासन स्वयं की बसें खरीदे, स्वयं के परमिट लेकर उन रूटों पर सेवा प्रारंभ करे जहां वर्तमान में परमिट उपलब्ध नहीं हैं, तो बस ऑपरेटरों को कोई आपत्ति नहीं है।
आपत्ति इस बात पर है कि जो रूट वर्षों से निजी ऑपरेटरों द्वारा संचालित हैं, उन्हीं पर पुराने परमिट निरस्त कर टेंडर आधारित नई व्यवस्था लागू की जाए। यूनियन का कहना है कि यह छोटे मोटर मालिकों के साथ न्यायसंगत नहीं होगा।
सामाजिक दायित्व और वर्षों की सेवा
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि निजी बस ऑपरेटर केवल व्यावसायिक गतिविधि नहीं चला रहे, बल्कि सामाजिक दायित्व भी निभा रहे हैं—
दिव्यांग यात्रियों को 50 प्रतिशत किराया छूट
विद्यार्थियों को रियायती सुविधा
कई मार्गों पर आरटीओ दर से कम किराया
खंडवा-इंदौर सहित अन्य प्रमुख मार्गों पर नियमित सेवा
यूनियन का कहना है कि यदि नई नीति के कारण छोटे ऑपरेटर बाहर होते हैं तो यात्रियों को दी जा रही ये सुविधाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
प्रशासन से पुनर्विचार की मांग
बस ऑपरेटरों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि नई नीति लागू करने से पूर्व व्यापक चर्चा कर छोटे और मध्यम मोटर मालिकों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रदेश में कई अधूरे विकास कार्य—जैसे पुल-पुलिया और आधारभूत संरचना परियोजनाएं—लंबित हैं। शासन को परिवहन व्यवस्था को अस्थिर करने के बजाय इन कार्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
2 मार्च से हड़ताल की चेतावनी
प्रदेश स्तरीय बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार यदि शासन ने मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।
ज्ञापन सौंपने के दौरान सुनील आर्य, राजीव शर्मा, सिमरन चावला, गगन राजपाल, अंकित गौर, राजू अजमानी, विनोद वर्मा, सुधीर सिटोके, राजू पाटिल, रूपल अजमानी, सागर जायसवाल, लक्ष्य खंडेलवाल, सावन जायसवाल, अभिशु शर्मा सहित अन्य बस ऑपरेटर उपस्थित रहे।

अब प्रशासन और शासन के समक्ष यह चुनौती है कि वे परिवहन सुधार और वर्षों से संचालित व्यवस्था के बीच संतुलन कैसे स्थापित करते हैं। यदि समाधान नहीं निकला तो 2 मार्च के बाद प्रदेशभर में बसों के पहिए थम सकते हैं, जिसका सीधा प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ेगा।
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