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खंडवा में शासकीय परिसरों पर मंथन तेज
खेल परिसर निरीक्षण से उठी चर्चा, शिवसेना नेता गणेश भावसार ने उठाए आवंटित भवनों पर सवाल
खंडवा। जिले में विकास कार्यों के साथ अब शासकीय संपत्तियों के वास्तविक उपयोग को लेकर भी गंभीर मंथन शुरू हो गया है। एक ओर जिला प्रशासन द्वारा खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए बंद पड़े भवनों का निरीक्षण किया जा रहा है, तो दूसरी ओर वर्षों से विभिन्न संस्थाओं के नाम पर आवंटित परिसरों की उपयोगिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
नर्सरी से शुरू हुई सक्रियता
हाल ही में जिला कलेक्टर ऋषव गुप्ता और जिला पंचायत सीईओ नागार्जुन गौड़ा ने सिविल लाइन क्षेत्र स्थित निमाड़ नर्सरी का अवलोकन किया। यहां शासकीय भूमि पर प्रस्तावित खेल परिसर को व्यवस्थित करने की योजना पर चर्चा हुई। निरीक्षण के दौरान वह पुराना भवन भी अधिकारियों की नजर में आया, जो पूर्व में खेल विभाग के उपयोग में था, लेकिन लंबे समय से निष्क्रिय पड़ा था।
प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि ऐसे भवनों को पुनः उपयोग में लाया जाएगा, ताकि खिलाड़ी बेहतर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें। इनडोर स्टेडियम में भी कई कमरे खाली पाए जाने की चर्चा है, जहां संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद उनका समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा।
संदेश स्पष्ट है—अब शासकीय संपत्तियां केवल फाइलों में “उपयोग में” नहीं रहेंगी, बल्कि वास्तविक गतिविधियों से जुड़ेंगी।
आवंटित परिसरों की समीक्षा की मांग
इसी बीच शिवसेना नेता गणेश भावसार ने प्रेस नोट जारी कर शासकीय भवनों के आवंटन और उपयोग की समीक्षा की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिले में कई भवन वर्षों पूर्व विभिन्न संस्थाओं को दिए गए, लेकिन वर्तमान में उनका उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप दिखाई नहीं देता।
भावसार ने कहा कि विडंबना यह है कि कई शासकीय विभाग और सामाजिक संस्थाएं किराए के भवनों में कार्य कर रही हैं, जबकि दूसरी ओर बड़े-बड़े परिसर केवल नामपट्टिका के सहारे आवंटित बने हुए हैं।
उन्होंने शहर के चर्चित वनिता विश्व परिसर का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी भवन को “वृद्ध आश्रम” के नाम पर आवंटित किया गया है, तो वहां विधिवत मान्यता प्राप्त संस्था, पंजीयन और नियमित गतिविधियां स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए। यदि वास्तविकता इसके विपरीत है और न तो कोई मान्यता प्राप्त संस्था संचालित है, न ही आश्रम की व्यवस्थित व्यवस्था, तो केवल एक छोटे से बोर्ड की आड़ में परिसर को रोके रखना उचित नहीं कहा जा सकता।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कुछ आवंटित परिसरों के हिस्सों का उपयोग किराए पर देकर आय के स्रोत के रूप में किया जा रहा है। यदि ऐसा है, तो यह मूल उद्देश्य से विचलन माना जाएगा।


भावसार ने कहा कि शासन को ऐसे सभी भवनों की निष्पक्ष जांच कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शासकीय संपत्ति समाजहित में उपयोग हो। व्यर्थ या निष्क्रिय संस्थाओं के नाम पर पड़े भवनों को वास्तविक जरूरतमंद विभागों या सक्रिय संगठनों को दिया जाना चाहिए।
जवाबदेही की ओर बढ़ता कदम?
खेल परिसर के निरीक्षण से शुरू हुई यह चर्चा अब व्यापक स्वरूप लेती दिख रही है। प्रशासन की सक्रियता और राजनीतिक स्तर पर उठती आवाजों के बीच यह मुद्दा केवल भवनों का नहीं, बल्कि सार्वजनिक संसाधनों की जवाबदेही का बन गया है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या शासकीय परिसरों की व्यापक समीक्षा कर निष्क्रिय संपत्तियों को पुनः समाजोपयोगी बनाया जाएगा, या फिर यह बहस भी कागज़ों तक सीमित रह जाएगी। फिलहाल, खंडवा में बंद दरवाजों और लगे हुए बोर्डों के पीछे की वास्तविकता चर्चा के केंद्र में है।
भाजपा प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि ऋषव गुप्ता और जिला पंचायत सीईओ नागार्जुन गौड़ा ने आज नर्सरी परिसर में खेल विभाग के पूर्व उपयोग में रहे भवन का निरीक्षण किया। लंबे समय से निष्क्रिय पड़े इस भवन को पुनः खिलाड़ियों के उपयोग में लाने पर चर्चा की गई।















