खंडवा में अनोखा जॉब कार्ड घोटाला: एक कार्ड में दो धर्म, तालाब कागज़ पर तैयार, भुगतान जमीन से गायब

खंडवा। मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में विकास की गंगा इन दिनों कागज़ों पर कुछ ज्यादा ही बह रही है। ग्राम पंचायत सिहाड़ा में मनरेगा का ऐसा अनोखा मॉडल सामने आया है, जिसे देखकर शायद “राष्ट्रीय एकता” भी सोच में पड़ जाए। यहां एक ही जॉब कार्ड में हिंदू और मुस्लिम परिवारों के नाम दर्ज कर 100 दिन का काम पूरा दिखा दिया गया — मानो सद्भावना का नया प्रशासनिक प्रयोग चल रहा हो।

ग्रामीण जब जनसुनवाई में पहुंचे तो उन्होंने बताया कि जिन लोगों के नाम से भुगतान दर्शाया गया है, उन्होंने न तो फावड़ा उठाया और न ही मजदूरी की एक दिन की हाजिरी लगाई। लेकिन कागज़ों में वे पूरे 100 दिन पसीना बहा चुके हैं। राशि भी “आहरित” हो चुकी है — बस खातों तक पहुंचने का रास्ता शायद अभी निर्माणाधीन है।
इतना ही नहीं, कुछ जॉब कार्डों में पिता और पुत्र दोनों की उम्र 18 वर्ष बताई गई है। गांव में लोग अब मज़ाक में कह रहे हैं कि यहां समय भी पंचायत की अनुमति से चलता है — पिता और पुत्र एक साथ वयस्क हो जाते हैं।
तालाब निर्माण का मामला तो और भी रोचक है। ग्रामीणों का कहना है कि तालाब कागज़ों में लबालब भरा हुआ है, मगर जमीन पर उसकी जगह अभी भी सूखी पड़ी है। बिना तालाब बनाए ही लाखों रुपये का भुगतान हो गया। यानी पानी नहीं आया, पर पैसा जरूर बह गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह सब लंबे समय से चल रहा है और जिम्मेदारों की आंखें शायद “विकास” की चमक से चौंधिया गई हैं। जनसुनवाई में शिकायत के बाद अधिकारियों ने जांच का आश्वासन दिया है। फिलहाल गांव में चर्चा है कि अगर जांच भी कागज़ों में ही पूरी हो गई तो आश्चर्य नहीं होगा।
अब देखना यह है कि कागज़ी तालाब में डूबा यह मामला सच की जमीन पर कब उतरता है, या फिर 100 दिन पूरे होने के बाद स्वतः ही “समाप्त” घोषित कर दिया जाएगा।















