पटवारी पर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश
अवैध मुरम खनन पर कार्रवाई के दौरान माफिया का हमला
खंडवा/चर्चा न्यूज़
( सुशील विधाणी)
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में खनिज माफिया के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका खौफनाक उदाहरण जावर सर्किल के ग्राम भकराडा में सामने आया। अवैध मुरम उत्खनन की शिकायत पर कार्रवाई करने पहुंचे पटवारी पर ही माफिया ने ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश कर दी। गनीमत रही कि पटवारी की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया, लेकिन घटना ने प्रशासनिक अमले की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रविवार को राजस्व विभाग को सूचना मिली थी कि भकराडा गांव की शासकीय भूमि पर बड़े पैमाने पर मुरम का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। सूचना के आधार पर हल्का पटवारी मयंक फुलेरिया मौके पर पहुंचे, जहां एक जेसीबी मशीन और चार ट्रैक्टरों से मुरम निकाली जा रही थी और पास के मुर्गी केंद्र तक पहुंचाई जा रही थी।
पटवारी के पहुंचते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आरोपी भागने लगे। इसी दौरान भकराडा निवासी कुंदन पिता गजेंद्र राजपूत ने ट्रैक्टर को तेज गति से पटवारी की ओर दौड़ा दिया और उसे कुचलने का प्रयास किया। पटवारी ने सूझबूझ दिखाते हुए खुद को बचा लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
घटना के बाद अधिकांश ट्रैक्टर चालक मौके से फरार हो गए, जबकि जेसीबी मशीन गड्ढे में फंस गई, जिसे प्रशासन ने जब्त कर लिया। जेसीबी चालक सावन भिलाला (निवासी बांगरदा) और एक अन्य चालक मुकेश सोलंकी (निवासी बिजोरा भील) की पहचान कर ली गई है।
सूचना मिलते ही राजस्व और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और कार्रवाई करते हुए जेसीबी को जब्त कर थाना जावर में खड़ा कराया गया। तहसीलदार महेश सोलंकी ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 221, 132, 110, 303(2), 3(5) के तहत तथा खान एवं खनिज अधिनियम की धारा 21 व 4 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है।
वीडियो वायरल के बाद उठे सवाल, कार्रवाई पर घिरा प्रशासन
घटना के बाद अब इस पूरे मामले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि यदि वीडियो सामने नहीं आता, तो क्या इस मामले में इतनी तत्परता से कार्रवाई होती? यह भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रशासन केवल वायरल वीडियो के दबाव में सक्रिय हुआ है।
वहीं दूसरी ओर कुछ लोग शासकीय कर्मचारी के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं और इसे कर्तव्य निभाते हुए जान जोखिम में डालने वाला साहसिक कदम बता रहे हैं। जबकि कुछ आवाजें यह भी कह रही हैं कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तविक दोषी कौन है—शासकीय कर्मचारी पूरी तरह सही है या फिर किसी स्तर पर स्थिति को अलग तरीके से पेश किया जा रहा है।
इस घटनाक्रम ने खनिज माफिया के बढ़ते दबदबे के साथ-साथ प्रशासनिक कार्रवाई की पारदर्शिता पर भी बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि जांच के बाद सच्चाई क्या सामने आती है और दोषियों पर कितनी सख्ती से कार्रवाई होती है।















