खंडवा में ‘शक्ति प्रदर्शन’ या ‘सिस्टम का खेल’? काली साड़ी रैली के पीछे क्या है राज!
वायरल व्हाट्सएप से उठा तूफान, आंगनवाड़ी दूरी ने बढ़ाया सस्पेंस—जांच पर टिकी निगाहें

खंडवा में महिला मोर्चा का शक्ति प्रदर्शन जारी, वायरल व्हाट्सएप मैसेज पर विवाद गहराया, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता रैली से दूर रहीं
खंडवा चर्चा न्यूज़ विशेष /( सुशील विधाणी )
खंडवा में भाजपा महिला मोर्चा द्वारा निकाली गई जन आक्रोश महिला पदयात्रा और सम्मेलन को लेकर सियासी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। बीते दिन महिला बाल विकास विभाग से जुड़े एक व्हाट्सएप मैसेज के वायरल होने के बाद यह मामला और तूल पकड़ गया। वायरल चैट में कथित तौर पर विभागीय ग्रुप के माध्यम से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को 200 महिलाओं को काली साड़ी में भाजपा कार्यालय पहुंचाने के निर्देश दिए गए थे।
इस मैसेज के सामने आते ही विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे मुद्दा बना लिया और भाजपा पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया। मामले ने तेजी से राजनीतिक रंग लिया, जिसके बाद पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन की नजर भी टिकी रही।

इसी विवाद के बीच रविवार को भाजपा महिला मोर्चा ने अपना कार्यक्रम निर्धारित अनुसार जारी रखा। भाजपा कार्यालय से कलेक्टर कार्यालय के समीप महाराणा प्रताप प्रतिमा तक निकाली गई इस पदयात्रा में हजारों की संख्या में महिलाएं काली साड़ी पहनकर शामिल हुईं और कांग्रेस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए महिला एकजुटता का प्रदर्शन किया।
हालांकि, विवाद के केंद्र में रहीं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं इस रैली में नजर नहीं आईं। माना जा रहा है कि वायरल मैसेज के बाद उपजे विवाद और संभावित कार्रवाई के डर से उन्होंने दूरी बनाए रखी। इसके बावजूद महिला मोर्चा का कार्यक्रम प्रभावित नहीं हुआ और बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी के साथ रैली सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
रैली में भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती चारुलता मंगल यादव ने भाग लिया। उनके साथ खंडवा विधायक, पुनासा विधायक नारायण पटेल, पूर्व विधायक वर्मा सहित भाजपा के कई पदाधिकारी और पिंकी राठौर एवं महिला सदस्य कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिन्होंने रैली के अंत में महिलाओं का समर्थन किया।
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर वायरल व्हाट्सएप मैसेज की सत्यता की जांच की जा रही है, वहीं दूसरी ओर यह भी देखा जा रहा है कि कहीं सरकारी कर्मचारियों पर किसी राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल होने का दबाव तो नहीं बनाया गया। यदि जांच में ऐसा पाया जाता है, तो यह सेवा नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।
फिलहाल, प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब सबकी नजर प्रशासनिक जांच पर टिकी है, जिससे इस पूरे विवाद की सच्चाई सामने आ सके।
खंडवा में यह मामला अब सिर्फ एक रैली तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सरकारी तंत्र की निष्पक्षता और राजनीतिक मर्यादा से जुड़ा अहम मुद्दा बन चुका है।















