मातृत्व की मिसाल बनीं दीपमाला विधाणी
अनाथ बच्चों की ‘मां’ बनकर दी नई जिंदगी, किलकारी शिशु गृह से देश-विदेश तक पहुंचीं नन्हीं किलकारियां
खंडवा। कहते हैं कि मां का आंचल किसी भी बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित और स्नेहमयी आश्रय होता है। लेकिन जब किसी नन्हीं ज़िंदगी को जन्म लेते ही यह सहारा नहीं मिल पाता, तब समाज में कुछ संवेदनशील लोग ऐसे भी होते हैं जो उनके लिए उम्मीद का घर बन जाते हैं। खंडवा में ऐसी ही एक प्रेरणादायक पहल की पहचान बनी हैं संस्था संचालक दीपमाला विधाणी, जिन्होंने अपने जीवन को अनाथ, परित्यक्त और बेसहारा बच्चों के पालन-पोषण और पुनर्वास के लिए समर्पित कर दिया है।
महिला दिवस के अवसर पर उनकी यह पहल मातृत्व, सेवा और महिला सशक्तिकरण की सशक्त मिसाल बनकर सामने आती है। सहज समागम फाउंडेशन के माध्यम से संचालित किलकारी शिशु गृह एवं विशेष दत्तक ग्रहण अभिकरण केंद्र वर्षों से उन बच्चों के लिए सुरक्षित आश्रय बना हुआ है, जिन्हें जीवन की शुरुआत में ही परिवार का सहारा नहीं मिल पाया।
स्वयं के संसाधनों से खड़ा किया सेवा का घर
दीपमाला विधाणी ने इस सेवा कार्य के लिए किसी बड़े संसाधन या सहयोग का इंतजार नहीं किया। उन्होंने अपने स्वयं के संसाधनों, दृढ़ संकल्प और संवेदनशीलता के बल पर संस्था के लिए भवन तैयार कराया और शासकीय नियमों तथा प्रक्रियाओं के अनुसार उसे विकसित किया।
आज यह केंद्र निमाड़ क्षेत्र में बाल संरक्षण और दत्तक ग्रहण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संस्था के रूप में स्थापित हो चुका है। यहां एक दिन के नवजात से लेकर लगभग छह वर्ष तक के बच्चों को सुरक्षित आश्रय, पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराया जाता है। बच्चों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है, ताकि उन्हें परिवार मिलने तक किसी भी प्रकार की कमी महसूस न हो।


प्रीमेच्योर और कुपोषित शिशुओं को दिया नया जीवन
किलकारी शिशु गृह की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां कई ऐसे बच्चे भी पहुंचे जिन्हें शासकीय रूप से पालन-पोषण के लिए संस्था को सौंपा गया था। इनमें कई शिशु बेहद कम वजन वाले, प्रीमेच्योर जन्मे या गंभीर कुपोषण की स्थिति में थे।
संस्था में इन बच्चों को विशेष देखभाल, संतुलित पोषण और चिकित्सकीय निगरानी प्रदान की गई। कई बच्चों को कुपोषण की स्थिति से बाहर निकालकर उनका वजन और स्वास्थ्य सामान्य स्तर तक लाया गया। इसके बाद दत्तक ग्रहण की कानूनी प्रक्रिया के लिए आवश्यक सभी स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों को पूरा कराया गया।
कभी कमजोर और असहाय दिखने वाले यही बच्चे आज स्वस्थ होकर नई जिंदगी की ओर बढ़ चुके हैं।
50 से अधिक बच्चों को मिला परिवार का आंचल
अब तक इस केंद्र के माध्यम से लगभग 50 से अधिक बच्चों को नया जीवन और परिवार का स्नेह मिल चुका है। इन बच्चों को विधिवत कानूनी प्रक्रिया के तहत दत्तक ग्रहण के माध्यम से मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में परिवार मिले हैं।

इतना ही नहीं, संस्था से जुड़े कई बच्चों को विदेश में रहने वाले भारतीय परिवारों ने भी अपनाया है। आज ये बच्चे अपने नए परिवारों के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित वातावरण में जीवन की नई राह पर आगे बढ़ रहे हैं।
CARA के नियमों के अनुसार होती है पूरी प्रक्रिया
किलकारी शिशु गृह में दत्तक ग्रहण की पूरी प्रक्रिया CARA (Central Adoption Resource Authority) के दिशा-निर्देशों और शासकीय नियमों के अनुसार की जाती है। इसमें बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य परीक्षण, कानूनी प्रक्रिया और परिवार चयन जैसे सभी चरणों का पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ पालन किया जाता है।
संवेदनशीलता की एक मिसाल
इसी मानवीय दृष्टिकोण का उदाहरण हाल ही में सामने आया जब बुरहानपुर के एक अस्पताल में जन्मी एक नवजात बालिका को विशेष चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता बताई गई। जानकारी मिलने पर संस्था की टीम ने अस्पताल पहुंचकर बालिका की स्थिति का निरीक्षण किया और बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की पहल की।

चिकित्सकीय सलाह के अनुसार बालिका को आगे बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए इंदौर स्थानांतरित कराया गया, जहां उसका उपचार जारी है। यह पहल संस्था की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को दर्शाती है।
कई बच्चों की बदली जिंदगी
किलकारी शिशु गृह से जुड़े ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जहां समय पर संरक्षण और देखभाल मिलने से बच्चों का जीवन पूरी तरह बदल गया। कई बच्चे आज बड़े शहरों में अपने दत्तक माता-पिता के साथ पढ़ाई कर रहे हैं और सुरक्षित वातावरण में अपना भविष्य संवार रहे हैं।
कभी जिन बच्चों की पहचान सिर्फ “अनाथ” या “परित्यक्त” के रूप में होती थी, आज वही बच्चे नई पहचान और उज्ज्वल भविष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
“हर बच्चे को परिवार का अधिकार”
संस्था संचालक दीपमाला विधाणी का कहना है कि हर बच्चे को परिवार और स्नेह का अधिकार मिलना चाहिए। उनका मानना है कि यदि समाज और प्रशासन मिलकर प्रयास करें तो कोई भी बच्चा असहाय नहीं रहेगा और हर नन्हीं ज़िंदगी को एक सुरक्षित भविष्य मिल सकेगा।

निमाड़ में बन रही चर्चा
महिला दिवस के अवसर पर दीपमाला विधाणी की यह सेवा भावना आज निमाड़ क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। अनाथ और बेसहारा बच्चों को मातृत्व का स्नेह देकर उन्हें नया जीवन देने की उनकी यह पहल समाज के लिए प्रेरणा बन रही है।
समाजसेवा, संवेदनशीलता और मातृत्व की यह मिसाल यह संदेश देती है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो एक महिला भी अपने प्रयासों से कई नन्हीं ज़िंदगियों का भविष्य संवार सकती है।















