“अब डर नहीं, जवाब देंगे!”
खंडवा में आत्मरक्षा का बिगुल—पहले ही दिन 250 प्रशिक्षु मैदान में उतरे

खंडवा/चर्चा न्यूज़ विशेष
सुशील विधाणी
अब वक्त बदल चुका है—सिर्फ सावधानी नहीं, जवाब देना भी जरूरी है। इसी सोच को साकार रूप देते हुए सिंधी कॉलोनी स्थित बगीचा ग्राउंड में रविवार सुबह 7 बजे पांच दिवसीय आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर का जोरदार शुभारंभ हुआ। उद्घाटन के साथ ही माहौल जोश, आत्मविश्वास और संकल्प से भर उठा।
शिविर का शुभारंभ सिंधी समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों, मातृशक्ति एवं हनुमानगढ़ अखाड़ा के युवाओं की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में श्री पूज्य सिंधी पंचायत एवं सेवा मंडली के अध्यक्ष मेठाराम पिंजानी, समाजसेवी डॉ. दिलीप हिंदूजा, लायन घनश्याम वाधवा, पार्षद काजल सोनू लालवानी, भाषा शिक्षिका रानी खेमानी, कोमल होतवानी, शेखर चंदवानी, टिम्मू चंचलानी, कन्हैयालाल सहजवानी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में हनुमानगढ़ अखाड़ा के संचालक मनीष कुमार मलानी व प्रवक्ता कमल नागपाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा—“आज के दौर में सिर्फ ‘सुरक्षा की उम्मीद’ नहीं, ‘सुरक्षा की क्षमता’ जरूरी है।” इसी उद्देश्य के साथ विश्व रिकॉर्ड होल्डर एवं सुविख्यात प्रशिक्षक बलवंत सिंह देवड़ा द्वारा प्रशिक्षुओं को व्यावहारिक आत्मरक्षा के गुर सिखाए जा रहे हैं।
पहले ही दिन 250 से अधिक युवाओं, माताओं और बहनों ने पंजीयन कर प्रशिक्षण लिया—जो इस पहल की सफलता और समाज की जागरूकता का बड़ा संकेत है। शिविर में सुबह 7 से 9 बजे और शाम 5 से 7 बजे तक नियमित प्रशिक्षण दिया जाएगा।

यह शिविर 22 मार्च से 26 मार्च तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें श्री पूज्य सिंधी पंचायत एवं सिंधी सेवा मंडली का सराहनीय सहयोग मिल रहा है। खास बात यह है कि यह आयोजन केवल एक समाज तक सीमित नहीं रहा—बल्कि खंडवा जिले के विभिन्न क्षेत्रों और सभी वर्गों के लोग इसमें बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं।
सिंधी समाज के प्रवक्ता कमल नागपाल ने बताया कि खंडवा में इस प्रकार का यह पहला प्रयास है, जिसे हनुमानगढ़ अखाड़ा शाला के युवा दल ने साकार किया है। इस युवा टोली में राहुल चंचलानी, जतिन दुल्हानी, रितेश आहूजा, कृष्णा रेवतानी, हर्ष गोस्वामी सहित कई युवाओं की सक्रिय भूमिका रही।
व्यंग्यात्मक लेकिन प्रेरक संदेश के साथ शिविर यह भी बता रहा है—
“अब ‘सेल्फी’ का नहीं, ‘सेल्फ डिफेंस’ का जमाना है… मंच पर ताली से ज्यादा, मैदान में ताकत जरूरी है।”
इस पहल ने साफ कर दिया है कि खंडवा अब केवल आयोजन नहीं कर रहा, बल्कि बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा रहा है—जहां हर महिला, हर युवा खुद की सुरक्षा के लिए तैयार होगा।
सिंधी समाज अब आत्मनिर्भरता के साथ आत्मरक्षा में भी मजबूत बन रहा है।
हर चुनौती का सामना करने के लिए समाज पूरी तरह तैयार और सक्षम है।
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