नई पीढ़ी के मन में जब विचारों की लौ जगी,
विभाग प्रचारक माननीय विजेंद्र जी गोठी की वाणी से दिशा मिली।
“भाई साहब के बल” को स्टेटस बनाकर गर्व जताया,
शब्द नहीं, संकल्प बनाकर युवाओं ने जीवन में उतारा।
चर्चा न्यूज़ सुशील विधाणी
खंडवा हिंदू सम्मेलन में खंडवा विभाग प्रचारक मा. विजेंद्र जी गोठी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि हिंदू कोई नया जागरण नहीं कर रहा, बल्कि वह अपने मूल स्वभाव—एकता, समरसता और विश्व-कल्याण—की ओर पुनः लौट रहा है। उनके विचारों का वीडियो देशभर में एकता के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है, जिसे सुनकर यह स्पष्ट होता है कि भारत को श्रेष्ठ, सुसंस्कृत और सुखी बनाने की कामना करने वाला विचार आखिर किसका है।
उन्होंने कहा कि “पराई स्त्री माता के समान है और पराया धन मिट्टी के समान है”—यह उदात्त सोच किसी एक काल की नहीं, बल्कि हिंदू जीवन-दर्शन की आधारशिला है। यही वह विचार है जिसने भारत को केवल एक राष्ट्र नहीं, बल्कि एक संस्कृति के रूप में विश्व के सामने खड़ा किया।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज योजनाबद्ध तरीके से हिंदू समाज को जाति, वर्ग, समाज और आरक्षण जैसे मुद्दों पर भ्रम फैलाकर बाँटने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि हिंदू एक जाजम पर न आ सके। क्योंकि यदि हिंदू समाज एक साथ बैठ गया, तो भारत वैसा ही बनेगा जैसा वह बनना चाहता है—सशक्त, समरस और विश्व को दिशा देने वाला।
विजेंद्र जी गोठी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिंदुत्व कोई संकीर्ण विचार नहीं, बल्कि यह एक जीवन शैली और संस्कृति है, जो कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक समान है। “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की कामना करने वाला समाज यदि कोई है, तो वह हिंदू समाज है।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि समाज को तोड़ने वाले षड्यंत्रों को पहचाना जाए और जातिगत भेदभाव, कृत्रिम विभाजन व भ्रम से ऊपर उठकर सभी समुदाय एकता के सूत्र में बंधें। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भी यही है कि समाज को जोड़ते हुए देश को मजबूत किया जाए।
अपने विचारों को श्लोकों के माध्यम से स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा—
“परस्त्री मातृवत् दृष्टा, परद्रव्येषु लोष्ठवत्।
आत्मवत् सर्वभूतेषु, यः पश्यति स पण्डितः॥”
अर्थात—जो व्यक्ति पराई स्त्री को माता समान, पराए धन को मिट्टी समान और सभी प्राणियों को अपने समान देखता है, वही सच्चा ज्ञानी है।
दूसरे श्लोक के माध्यम से उन्होंने समरसता का संदेश दिया—
“सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्॥”
उन्होंने कहा कि यही हिंदू विचार है, यही हिंदुत्व है और यही भारत की आत्मा है। आज जब हिंदू समाज पुनः एकत्र होने लगा है, तब आवश्यकता है कि हम सब मिलकर एकता की मिसाल प्रस्तुत करें और भारत को सशक्त, समरस एवं विश्व-कल्याण की दिशा में अग्रसर करें।
विभाग प्रचारक माननीय विजेंद्र जी गोठी की वाणी से दिशा मिली।
“भाई साहब के बल” को स्टेटस बनाकर गर्व जताया,
शब्द नहीं, संकल्प बनाकर युवाओं ने जीवन में उतारा।
चल रही है चर्चा……















