एक दरिंदगी, तीन उम्रकैद: हरसूद कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

एक अपराध, तीन आजीवन कारावास: खंडवा के हरसूद कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
चर्चा न्यूज़
खंडवा। क्या आपने कभी सुना है कि एक ही जघन्य वारदात में किसी आरोपी को तीन-तीन बार उम्रकैद की सजा सुनाई जाए? खंडवा जिले के हरसूद न्यायालय ने ऐसा ही एक ऐतिहासिक फैसला सुनाकर पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
महिला के साथ दुष्कर्म, उसकी हत्या और उसके शरीर के निजी अंगों को क्षति पहुंचाने जैसे संगीन अपराधों में अदालत ने मुख्य आरोपी हरिराम उर्फ हरी को ट्रिपल आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को बनाया था, लेकिन साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने हरिराम को दोषी ठहराते हुए तीन अलग-अलग धाराओं में उम्रकैद दी, जबकि दूसरे आरोपी को बरी कर दिया।
क्यों है यह फैसला खास?
आम तौर पर एक ही प्रकरण में एक उम्रकैद की सजा सुनाई जाती है, लेकिन यहां अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए तीन अलग-अलग अपराधों—
दुष्कर्म
हत्या
महिला के शरीर के अंगों के साथ अमानवीय छेड़छाड़
—पर अलग-अलग आजीवन कारावास सुनाया। कानूनी जानकारों के अनुसार, यह सजा साथ-साथ (concurrent) चले या क्रमवार (consecutive), यह आदेश की शर्तों पर निर्भर करता है, लेकिन संदेश साफ है—अपराध की क्रूरता के अनुरूप कठोर दंड।
8 माह में आया फैसला
करीब आठ माह पहले हुई इस वारदात ने क्षेत्र में भारी आक्रोश पैदा किया था। मामला सियासी गलियारों तक पहुंचा और कांग्रेस नेता विक्रांत भूरिया सहित अन्य नेता गांव पहुंचे थे। पीड़ित परिवार की बात राहुल गांधी से भी कराई गई थी।
न्याय का कड़ा संदेश
हरसूद कोर्ट के इस फैसले को महिला अपराधों के खिलाफ सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है। “ट्रिपल आजीवन कारावास” की यह सजा न सिर्फ जिले बल्कि प्रदेश में चर्चा का विषय बन गई है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि महिलाओं के खिलाफ बर्बर अपराध करने वालों के लिए कानून में कोई नरमी नहीं
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