करोड़ों का घोटाला, जिला सहकारी बैंक और समिति में झोलझाल — कार्रवाई के नाम पर सिर्फ जांच
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25-30 करोड़ का खेल, सहकारी बैंक-समिति में गड़बड़झाला — कार्रवाई अब तक शून्य
चर्चा न्यूज़ विशेष/सुशील विधाणी
खंडवा। जिले की सहकारिता व्यवस्था इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। किसानों और ग्रामीणों की वर्षों की जमा पूंजी से जुड़ा करीब 25 से 30 करोड़ रुपए का बड़ा घोटाला सामने आने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो पाना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। घोटाले की परतें खुलने के बाद जांच के आदेश तो दिए गए, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल जांच ही चल रही है, जबकि पीड़ित खाताधारक अपनी ही जमा राशि के लिए महीनों से अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं।
बताया जा रहा है कि सहकारी समिति में ग्रामीणों और किसानों ने अपने जीवनभर की कमाई भरोसे के साथ जमा कराई थी। किसी ने बच्चों की पढ़ाई के लिए एफडी करवाई, तो किसी ने खेती-बाड़ी और परिवार की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लाखों रुपए जमा किए। कई खाताधारकों के 7 लाख, 6.75 लाख से लेकर 17 लाख रुपए तक की राशि फंसी हुई बताई जा रही है।
मामला सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आया और जांच के निर्देश दिए गए। कलेक्टर द्वारा सहकारिता विभाग को जांच कर एफआईआर दर्ज कराने तक के निर्देश दिए जाने की चर्चा रही, लेकिन पांच महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। इससे पीड़ित ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताओं की जानकारी सामने आई है। बताया जाता है कि जब खातों का मिलान किया गया तो कई जगह बैलेंस शून्य तक पहुंचने की स्थिति सामने आई, जिससे गड़बड़ी की राशि धीरे-धीरे बढ़ते हुए करीब 30 करोड़ रुपए तक पहुंचने की चर्चा होने लगी। इसके बावजूद जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिन किसानों और ग्रामीणों ने सहकारी संस्था को अपनी बचत का सबसे सुरक्षित माध्यम समझा, वही आज अपनी ही जमा राशि के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। कई लोगों को भुगतान के लिए चेक दिए गए, लेकिन वे भी बाउंस हो गए। इसके बाद खाताधारकों की उम्मीदें और चिंता दोनों बढ़ गई हैं।
जिले में यह भी चर्चा है कि यदि समय रहते इस मामले में सख्त कार्रवाई होती तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं बनती। लेकिन अब मामला करोड़ों की राशि तक पहुंच चुका है और जांच की धीमी रफ्तार प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है।
पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई और उनकी जमा पूंजी वापस दिलाने की व्यवस्था नहीं बनी, तो वे आंदोलन का रास्ता भी अपना सकते हैं।
चर्चा है कि करोड़ों के इस घोटाले में जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जगह सिर्फ जांच का सहारा लिया जा रहा है, जिससे सहकारिता व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
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