गुरु सिंह सभा के कथित झूठे आवेदन से भ्रम फैलाने का आरोप
नगर निगम नाका स्थित अवैध कब्जे झटका मटन बूचड़खाना पर झटका मटन के अवैध कब्जे पर निगम की कार्रवाई


खंडवा | विशेष रिपोर्ट
नगर निगम नाका क्षेत्र में स्थित सरकारी नाका, जहां झटका मटन का संचालन किया जा रहा था, वहां अवैध कब्जे को लेकर नगर निगम द्वारा की गई सील एवं कार्रवाई के बाद अब विवाद गहराता जा रहा है। किलकारी शिशु ग्रह द्वारा आवेदन दिया गया था कि प्रवासी क्षेत्र में हनुमान मंदिर के सामने पंडित माखनलाल स्कूल के सामने जैन स्थानक के बाजू में एवं रहो वास क्षेत्र में चल रहे स्लाइटर हाउस बूचड़खाना जिनके द्वारा गंदगी तथा खुले में मांस दुकान झटका मटन चल रहा है उसे पर सीएम हेल्पलाइन की कार्रवाई होने पर आरोप है कि गुरु सिंह सभा द्वारा एक झूठा और भ्रामक आवेदन देकर इस कार्रवाई को गलत रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया, जिसे बिना किसी ठोस सत्यापन के पत्रिका ने प्रेस नोट के आधार पर खबर के रूप में प्रकाशित कर दिया।
बिना वर्जन के बिना किसी प्रकार जांच भ्रामक खबर छापना निंदा विषय है
बताया जा रहा है कि जिस स्थान को लेकर कब्जे का आरोप लगाया जा रहा है, वह नगर निगम नाका में स्थित सरकारी नाका है, जहां अवैध रूप से झटका मटन का संचालन किया जा रहा था। इसी को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने नियमानुसार मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करते हुए परिसर को सील किया। यह पूरी कार्रवाई नगर निगम के रिकॉर्ड में दर्ज है।
संबंधित पक्ष का कहना है कि जिस भूमि को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है, उसकी पूरी रजिस्ट्री एवं वैधानिक दस्तावेज उपलब्ध हैं। इसके बावजूद गुरु सिंह सभा द्वारा दिए गए आवेदन में तथ्य छिपाए गए और एकतरफा आरोप लगाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई।
“नगर निगम नाका में हुई कार्रवाई सार्वजनिक तथ्य है। बिना स्थल निरीक्षण और दस्तावेज जांचे खबर प्रकाशित करना गैर-जिम्मेदाराना है और इससे मानहानि होती है,”

— संबंधित पक्ष का बयान
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर निगम नाका में झटका मटन के अवैध संचालन को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आ चुकी थीं। इसके बावजूद जब निगम ने कार्रवाई की, तो उसे झूठे आवेदन के जरिए विवादित रूप देने का प्रयास किया गया।

अब यह सवाल भी उठ रहा है कि प्रेस नोट को खबर बनाने से पहले तथ्यों का सत्यापन क्यों नहीं किया गया। जानकारों का मानना है कि इस तरह की अप्रमाणित खबरें न केवल जनता को भ्रमित करती हैं, बल्कि मीडिया की साख पर भी प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
फिलहाल पूरे मामले को लेकर शहर में यही चर्चा है कि आरोप लगाने से पहले सच्चाई देखना और प्रमाण जांचना जरूरी है, क्योंकि अधूरी जानकारी पर आधारित खबरें आगे चलकर कानूनी विवाद का कारण बन सकती हैं।
— चल रही है चर्चा















