खंडवा में बुलडोज़र कार्रवाई के बाद ‘मालवा’ बना लूट का ज़रिया
16 दुकानों पर संयुक्त कार्रवाई के बाद अब मलबे की निगरानी पर सवाल, शहर में गरमाई चर्चा

चर्चा न्यूज़
खंडवा। शहर में हाल ही में खंडवा नगर निगम और सिटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में 16 दुकानों पर संयुक्त बुलडोज़र कार्रवाई की गई। नियमानुसार नवीनीकरण न होने और अन्य प्रशासनिक कारणों को आधार बनाते हुए चार पक्की दुकानों को पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया। मशीनों से छतें और दीवारें तोड़ी गईं और वर्षों पुरानी संरचनाएं कुछ ही घंटों में मलबे में तब्दील हो गईं।
कार्रवाई के दौरान पुलिस बल और निगम अमला पूरी सख्ती के साथ मौजूद रहा, लेकिन कार्रवाई समाप्त होते ही हालात बदलते नजर आए। वर्तमान में उसी स्थल पर पड़े मलबे से सरिया, लोहे की एंगल, शटर के हिस्से और अन्य धातु सामग्री निकालकर ले जाते लोग खुलेआम दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कुछ लोग औजार लेकर मलबे को तोड़ते हैं और उपयोगी सामग्री लेकर चलते बनते हैं।
यहीं से शुरू हुई शहर में नई चर्चा।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब कार्रवाई प्रशासन की देखरेख में हुई, तो मलबे की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? यदि यह शासकीय संपत्ति है, तो क्या उसका पंचनामा बनाया गया? क्या सामग्री का मूल्यांकन हुआ? या फिर तोड़फोड़ के बाद व्यवस्था स्वतः समाप्त मान ली गई?
सूत्रों के अनुसार, 16 दुकानों में से कुछ दुकानें अभी भी नजूल की लीज पर दर्ज हैं, जिन पर कार्रवाई शेष है। संबंधित दुकानदारों को विस्थापन के लिए समय दिया गया है और एक-दो दिन में इन पर भी कार्रवाई होना लगभग निश्चित माना जा रहा है। ऐसे में क्षेत्र में एक बार फिर बुलडोज़र चलने की संभावना है।
शहर में यह चर्चा भी है कि यदि अगली कार्रवाई होती है, तो क्या इस बार मलबे को तत्काल हटाया जाएगा या फिर वही स्थिति दोहराई जाएगी? कुछ लोग इसे प्रशासनिक लापरवाही मान रहे हैं, तो कुछ इसे व्यवस्था की कमी बता रहे हैं।
व्यापारी वर्ग और आम नागरिकों के बीच तीन प्रमुख प्रश्न चर्चा का विषय बने हुए हैं—
मलबे का विधिवत पंचनामा और मूल्यांकन हुआ है या नहीं?
अवैध रूप से सामग्री निकालने वालों पर क्या कार्रवाई होगी?
आगामी कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को कैसे मजबूत किया जाएगा?
फिलहाल बुलडोज़र की गूंज थम चुकी है, लेकिन ‘मालवा प्रकरण’ अब शहर की चौपाल से लेकर व्यापारिक गलियारों तक चर्चा का विषय बन चुका है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शेष दुकानों पर प्रस्तावित कार्रवाई के साथ क्या निगरानी और प्रबंधन की व्यवस्था भी उतनी ही सख्त नजर आएगी, जितनी बुलडोज़र चलाते समय दिखाई दी थी।
खंडवा में यह मामला अब सिर्फ तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की परीक्षा बनता जा रहा है — और चर्चा यहीं से आगे बढ़ रही है।
चल रही है चर्चा………















