बजट आया था देश का, जवाब रुका था प्रदेश पर
“खोपड़ी- खोपड़ी झोपड़ी झोपड़ी तक तक सरकार की बात पहुंचना हमारा काम है , बोले डॉ. विजय शाह— सरकार हमारे लिए क्या काम कर रही है”
खंडवा में केंद्रीय बजट पर बोले मंत्री विजय शाह, सवाल आते ही ‘फिर मिलेंगे’ कहकर उड़ान भरी
चर्चा न्यूज़
खंडवा केंद्रीय बजट पर पत्रकारों को “संतुलित समझाइश” देने के लिए खंडवा बीजेपी कार्यालय पहुंचे मध्यप्रदेश शासन के मंत्री डॉ. विजय शाह की पत्रकार वार्ता शब्दों से ज्यादा संकेतों और विरामों में पूरी हुई।
मंत्री डॉ. विजय शाह ने बजट को आम आदमी से लेकर सरकार तक सबका ध्यान रखने वाला बताया। दूध उत्पादन से लेकर बच्चों के खेल मैदान तक—हर वर्ग के लिए बजट में कुछ न कुछ होने का दावा किया गया। बातों-बातों में यह भी समझा दिया गया कि बजट सिर्फ कागज़ी नहीं, बल्कि “सर्वस्पर्शी” है।
लेकिन जैसे ही पत्रकारों ने सवाल का रुख खेत-खलिहान, किसान और मध्यप्रदेश को मिलने वाले हिस्से की ओर मोड़ा, मंत्री जी का जवाब अचानक भविष्य काल में चला गया।
मंत्री विजय शाह का कहना था—
“जब मध्यप्रदेश शासन का बजट आएगा, तब बताएंगे कि प्रदेश को क्या मिला है। अभी समय है… फिर मिलेंगे… तब विस्तार से बात करेंगे कि आदिवासी क्षेत्रों और प्रदेश को क्या मिलेगा।”
इतना कहकर मंत्री जी ने पत्रकार वार्ता को खुद के शब्दों में समेटा, और उससे पहले कि कोई अगला सवाल जन्म ले—वे राजनीतिक रनवे से उड़ान भर चुके थे।
मंत्री के बाहर निकलते ही माहौल बदला।
बीजेपी कार्यालय में पंधाना विधायक, पूर्व विधायक देवेंद्र वर्मा और महापौर अमृता अमर यादव की एंट्री हुई—मानो एक दृश्य खत्म हुआ और दूसरा शुरू।
इस पूरी पत्रकार वार्ता के दौरान मंच पर खंडवा जिला अध्यक्ष राजपाल सिंह तोमर, जिला महामंत्री धर्मेंद्र बजाज, संतोष सोनी, पूर्व महापौर सुभाष कोठारी, तपन डोंगरे सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। सबने नपे-तुले शब्दों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई—जितनी ज़रूरी थी, उतनी ही सुरक्षित।
कुल मिलाकर,
खंडवा में केंद्रीय बजट पर यह पत्रकार वार्ता कम जवाबों, ज्यादा विरामों और भविष्य के आश्वासनों के साथ “इति श्री” हुई—जहां सवाल यहीं रह गए और जवाब अगली मुलाकात पर टाल दिए गए।
बजट की बातें चलीं देश से लेकर बच्चों के खेल तक,
पर प्रदेश की बारी आते ही मंत्री जी बोले—“अभी समय है… फिर मिलेंगे।”
चल रही है चर्चा……















