चर्चा न्यूज़ में आज की विशेष चर्चा
(सुशील विधाणी)
जहाँ होना चाहिए था—
बच्चों का विकास, पोषण और देखभाल,
वहीं चल रही है—
पदों की राजनीति और रसूख की जंग।
एक तरफ —
खालवा की CDPO श्रीमती नेहा यादव,
जिन्हें लेकर विभागीय स्तर पर चर्चा है कि
वे खुद को क्षेत्रीय मंत्री एवं जिला पंचायत उपाध्यक्ष खंडवा की करीबी बताती हैं।
और दूसरी तरफ —कांग्रेस नेता बाला बच्चन के करीबी पूर्व जिला उपाध्यक्ष रमेश चौहान की पत्नी श्रीमती रत्ना शर्मा,
साथ ही
जिनका नाम
करोड़ों की EOW जांच में जुड़ा और
2023 में आंगनवाड़ी भवन मरम्मत के नाम पर हुए कथित घोटाले में शामिल होने की चर्चा भी है,
फिर भी उन्हें जिले में महिला एवं बाल विकास अधिकारी की… संवेदनशील जिम्मेदारी दी गई है।
अब सबसे बड़ा विवाद —
जिले में Assistant District Program Officer (ADPO) और CDPO दोनों मौजूद हैं,
फिर भी खालवा विकासखंड का प्रभार एक सुपरवाइज़र को दे दिया गया।
जबकि नियम साफ बताते हैं —
सुपरवाइज़र पद, CDPO से कई स्तर नीचे होता है।
सूत्रों का तीखा तंज:
“यहाँ पोस्टिंग योग्यता से नहीं,
राजनीतिक पहचान से तय होती है।”
कर्मचारियों की तंजभरी फुसफुसाहट:
“आंगनवाड़ी में बच्चों को दूध मिले या न मिले…
पर कुर्सी मलाईदार होनी चाहिए!”

खंडवा के अब सीधे सवाल:
जांच में फंसी अधिकारी को जिम्मेदारी क्यों?
ADPO और CDPO को नजरअंदाज कर सुपरवाइज़र को चार्ज क्यों?
ये विभाग नियमों से चल रहा है या राजनीतिक संरक्षण से?
खंडवा पूछ रहा है —
यह महिला एवं बाल विकास विभाग है
या राजनीतिक पोस्टिंग का प्रशिक्षण केंद्र?
जवाब… अभी भी इंतज़ार में है।
















