
सवालों के घेरे में नगर निगम
चर्चा न्यूज़
खंडवा में शनिवार को सामने आया एक वीडियो अब सिर्फ वायरल कंटेंट नहीं, बल्कि हिंदू आस्था पर सीधा प्रहार बनकर उभरा है। टीचिंग ग्राउंड के पास कचरे के पहाड़ में गड्ढा खोदकर गौ माता को गाड़े जाने और नगर निगम कर्मचारियों द्वारा जेसीबी मशीन से तथाकथित दाह संस्कार किए जाने के दृश्य ने शहर की संवेदनशीलता और प्रशासनिक सोच—दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
वीडियो में साफ नजर आता है कि जिस स्थान पर गौ माता का अंतिम संस्कार किया गया, वह न तो धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुरूप था और न ही सम्मानजनक। चारों ओर गंदगी, बदबू और कचरा—और बीच में वह दृश्य, जिसे हिंदू समाज श्रद्धा और पवित्रता से जोड़ता है। सवाल यह नहीं कि गौ माता की मृत्यु कैसे हुई, सवाल यह है कि उनके संस्कार को कचरे के स्तर तक क्यों गिरा दिया गया?
बजरंग दल और हिंदू संगठनों का आक्रोश
घटना सामने आते ही बजरंग दल सहित विभिन्न हिंदू संगठनों ने तीखा विरोध दर्ज कराया। सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए संगठनों ने नगर निगम और नगरी प्रशासन से पूछा कि—
जब शहर में हजारों एकड़ शासकीय भूमि उपलब्ध है,
जब अन्य वर्गों, आयोजनों और गतिविधियों के लिए स्थान चिन्हित किए जाते हैं,
तो गौ माता के अंतिम संस्कार के लिए पवित्र स्थान क्यों नहीं?
संगठनों का आरोप है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि हिंदू धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने जैसा कृत्य है। गौ माता को भारत में माता का दर्जा प्राप्त है, फिर उनके अंतिम संस्कार में यह असंवेदनशीलता क्यों?
मनीष मालानी की घोर निंदा, प्रशासन से जवाब तलब
इस पूरे मामले पर खंडवा के मनीष मालानी ने घोर निंदा करते हुए नगर निगम और जिला प्रशासन से सार्वजनिक जवाब मांगा है। उनका कहना है कि—
“यह मामला सिर्फ एक वीडियो का नहीं है, यह उस सोच का आईना है,
जहाँ आस्था को फाइल में दबा दिया जाता है और
मशीनों से धर्म निभाने की कोशिश की जाती है।”
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह जानबूझकर हिंदू भावनाओं को आहत करने का प्रयास है या फिर प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह संवेदनशून्य हो चुका है?
सोशल मीडिया पर उबाल, सवालों की बाढ़
वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रियाएं दीं—
क्या अब आस्था भी डंपिंग यार्ड में निपटाई जाएगी?
क्या संस्कार मंत्रों से नहीं, मशीनों से होंगे?
क्या गौ माता के लिए इस “भारत भूमि” पर एक पवित्र स्थान भी उपलब्ध नहीं?
टीका-विषकन : धर्म डोजर के नीचे?
खंडवा में अब संस्कार भी आधुनिक हो गए हैं।
जहाँ मंत्रों की गूंज होनी चाहिए थी, वहाँ जेसीबी की आवाज़ सुनाई दी।
जहाँ श्रद्धा होनी चाहिए थी, वहाँ कचरे का अंबार खड़ा मिला।
हजारों एकड़ जमीन “उपयोग” के नाम पर उपलब्ध है,
लेकिन गौ माता के लिए वही जमीन अनुपयुक्त घोषित कर दी गई।
लगता है फाइलों में गौ माता का कोई कॉलम नहीं,
इसलिए उन्हें कचरे की श्रेणी में निपटा दिया गया।
प्रशासन मौन है, निगम चुप है—
शायद अगली बैठक में तय होगा कि
अगला संस्कार किस वार्ड के कचरे में होगा।
अब सवाल यह नहीं कि गलती हुई या नहीं,
सवाल यह है कि खंडवा में आस्था का सम्मान कौन तय करेगा—
धर्म या डोजर?
— चल रही है चर्चा… खबर वही जो चर्चा बने















