“एमपी गजब है… बात यहां से होती है!”
खंडवा।
मध्यप्रदेश की जनजातीय शिक्षा नीति एक बार फिर बदलाव के दौर में है। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. विजय शाह ने 88 ट्राइबल ब्लॉकों में छात्रावासों को बंद कर बस आधारित शिक्षा मॉडल लागू करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस फैसले के साथ ही सियासी और सामाजिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है।
कभी हॉस्टल थे भविष्य, अब बसें बनेंगी सहारा
कुछ वर्ष पहले तक दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों की पढ़ाई सुधारने के लिए बड़े पैमाने पर छात्रावास खोले गए थे। तर्क यह था कि रोजाना लंबी दूरी तय करने से समय और ऊर्जा दोनों बर्बाद होते हैं, इसलिए बच्चों को शैक्षणिक वातावरण में रहकर पढ़ने का अवसर दिया जाए।
अब नई घोषणा के मुताबिक प्रत्येक ट्राइबल ब्लॉक में 10-10 बसें चलाई जाएंगी। बच्चे सुबह घर से बस में बैठकर स्कूल/कॉलेज जाएंगे, दोपहर में भोजन करेंगे और शाम 5 बजे सुरक्षित घर लौटेंगे। आने-जाने और भोजन का पूरा खर्च सरकार उठाएगी।
खर्च कम या मॉडल बेहतर?
सरकार का कहना है कि यह निर्णय बच्चों के हित में है और उन्हें परिवार के बीच सुरक्षित माहौल मिलेगा। वहीं चर्चाओं में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या छात्रावासों के संचालन पर होने वाले खर्च को देखते हुए यह नीति परिवर्तन किया जा रहा है?
छात्रावासों के निर्माण, अधीक्षक और स्टाफ की नियुक्ति पर पहले ही करोड़ों खर्च हो चुके हैं। अब यदि वे बंद होते हैं तो उस निवेश का भविष्य क्या होगा — यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
प्रस्ताव पहुंचा मुख्यमंत्री तक
मंत्री विजय शाह ने बताया कि यह पूरा प्रोजेक्ट मुख्यमंत्री मोहन यादव को सौंप दिया गया है। आने वाले समय में इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
सरकार इसे जनजातीय शिक्षा में “व्यवस्थागत सुधार” बता रही है, जबकि विपक्ष इसे “नीति का यू-टर्न” करार दे रहा है।
असली सवाल: बच्चों को क्या मिलेगा?
नीति चाहे हॉस्टल की हो या बस की, असली कसौटी यही होगी कि:
क्या बच्चों की पढ़ाई बेहतर होगी?
क्या दूरस्थ क्षेत्रों में बस सेवा नियमित और सुरक्षित रह पाएगी?
क्या ड्रॉपआउट दर कम होगी?
फिलहाल इतना तय है — मध्यप्रदेश की शिक्षा नीति में एक और बड़ा प्रयोग शुरू होने वाला है।
और जैसा लोग कहते हैं — “एमपी गजब है… बात यहां से होती है!”हॉस्टल से बस तक: 88 छात्रावास बंद करने की तैयारी, ट्राइबल मंत्री का नया ‘बस मॉडल’ प्रस्ताव तैयार
“एमपी गजब है… बात यहां से धोती है!”
फिलहाल इतना तय है — मध्यप्रदेश की शिक्षा नीति में एक और बड़ा प्रयोग शुरू होने वाला है।
और जैसा लोग कहते हैं — “एमपी गजब है… बात यहां से होती है!”
चल रही है चर्चा……..
अंत में मंत्री डॉ. विजय शाह ने अपने अंदाज़ में कहा —
“हमें विजय शाह कहते हैं… हम खंडवा में रहते हैं, रास्ता निकाल ही लेते हैं।”
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