काम किसी का, नाम किसी का… हनुवंतिया टेंट सिटी में ठेका सिस्टम बेनकाब
पर्यटन का महोत्सव या ठेकेदारों का दंगल? हनुवंतिया से उठे सवाल
चर्चा न्यूज़
खंडवा मध्यप्रदेश पर्यटन का ‘मिनी गोवा’ कहे जाने वाला हनुवंतिया जल महोत्सव इस बार सैलानियों से ज्यादा विवादों के कारण सुर्खियों में है। जिस आयोजन को शिवराज सरकार की पर्यटन नीति की बड़ी उपलब्धि बताया जाता रहा, वही आयोजन अब ठेका सिस्टम, भुगतान विवाद और मारपीट की वजह से कटघरे में खड़ा है।
टेंट सिटी के भुगतान को लेकर शुरू हुआ विवाद गुरुवार को मारपीट तक पहुंच गया। इसके साथ ही पर्यटन विभाग की कार्यशैली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
टेंडर एक का, काम दूसरे का, एग्रीमेंट तीसरे का
सूत्रों के मुताबिक, शासन से टेंट सिटी संचालन का टेंडर एक कंपनी को दिया गया था, जिसने काम आगे दूसरी कंपनी को सौंप दिया। दूसरी कंपनी ने तीसरी कंपनी से एग्रीमेंट कर टेंट लगाने और संचालन का जिम्मा दिया। इसी ठेका चक्रव्यूह में भुगतान अटका और विवाद ने हिंसक रूप ले लिया।
भुगतान समय पर नहीं मिलने से नाराज तीसरी कंपनी ने टेंट उखाड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी, जिससे पूरे जल महोत्सव की व्यवस्थाएं चरमरा गईं।
जीएम से मारपीट, जानलेवा हमले का आरोप
स्काई क्लीन सॉल्यूशंस कंपनी के जीएम अंकित कुंडा ने बीड़ चौकी में दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि उन्हें 60 दिनों का ठेका दिया गया था, लेकिन तय समय से पहले टेंट हटवाए जाने से उनकी कंपनी को लाखों रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि गुरुवार को श्रवण सिंह अपने साथियों के साथ पहुंचे और उनके साथ मारपीट करते हुए जानलेवा हमला किया।
पुलिस बोली—जांच के बाद होगी कार्रवाई
बीड़ चौकी प्रभारी एसआई ज्ञानसिंह ने बताया कि दोनों पक्षों से आवेदन प्राप्त हुए हैं। सभी संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही प्रकरण दर्ज किया जाएगा।
70 लाख का आयोजन, जिम्मेदारी शून्य?
सूत्रों का कहना है कि करीब 50 कॉटेज 60 दिनों के लिए लगाए गए थे। आयोजन की कुल राशि लगभग 70 लाख रुपये तय हुई थी। आंशिक भुगतान हुआ, लेकिन बाकी राशि को लेकर विवाद बना रहा। सवाल यह है कि इतने बड़े आयोजन में भुगतान और निगरानी की स्पष्ट व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
गुपचुप उद्घाटन भी रहा चर्चा में
सूत्रों द्वारा यह भी बताया गया कि शिवराज सरकार के महत्वाकांक्षी हनुवंतिया टेंट सिटी और ‘मिनी गोवा’ कहे जाने वाले जल महोत्सव का उद्घाटन इस बार कब हुआ और कैसे हुआ—यह खुद एक बड़ा सवाल बन गया है। हर साल भव्य कार्यक्रम और प्रचार के साथ होने वाला उद्घाटन इस बार कथित तौर पर गुपचुप तरीके से किया गया, जिसे लेकर पर्यटन और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं गर्म हैं।
चर्चा यह भी है कि जब व्यवस्थाएं अधूरी थीं और भुगतान विवाद सुलग रहा था, तब औपचारिक उद्घाटन से बचने की रणनीति अपनाई गई।
पर्यटन विभाग की खुली पोल
पूरा मामला पर्यटन विभाग की निगरानी पर सवालिया निशान खड़ा करता है। टेंडर की शर्तों की निगरानी, सब-ठेका देने की अनुमति और भुगतान व्यवस्था—हर स्तर पर लापरवाही उजागर होती नजर आ रही है।
काम किसी का, नाम किसी का और जब मामला बिगड़ा तो सिस्टम नदारद—यही हनुवंतिया मॉडल बनकर सामने आया है।
एमपी गजब है!

जहां हनुवंतिया को मध्यप्रदेश टूरिज्म का मिनी गोवा बताया जाता है, वहीं अब यह आयोजन ठेकेदारों के दंगल, गुपचुप उद्घाटन और मारपीट की वजह से चर्चा में है। फिलहाल टेंट सिटी में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने पर्यटन महोत्सव की चमक फीकी कर दी है।
अब देखना यह है कि जांच सिर्फ कागज़ों तक सीमित रहती है या फिर उन जिम्मेदार चेहरों तक पहुंचती है, जिनकी लापरवाही ने पर्यटन के महोत्सव को विवादों का अखाड़ा बना दिया।
चल रही है चर्चा………















