तीसरे प्रयास में शानदार सफलता: खंडवा की रूपल जायसवाल ने यूपीएससी में 43वीं रैंक से बढ़ाया जिले का गौरव

मेहनत की मिसाल बनी खंडवा की बेटी रूपल जायसवाल, यूपीएससी में 43वीं रैंक से बढ़ाया निमाड़ का मान
चर्चा न्यूज़ |
दादाजी की नगरी खंडवा में प्रतिभाओं की कभी कमी नहीं रही है। यहां की मिट्टी में कुछ ऐसा है कि जब भी किसी युवा को सही दिशा और अवसर मिलता है, वह अपने हुनर से न केवल परिवार बल्कि पूरे जिले और प्रदेश का नाम रोशन कर देता है। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी खंडवा की होनहार बेटी रूपल जायसवाल ने लिखी है,खं जिन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में देशभर में 43वीं रैंक प्राप्त कर जिले का गौरव बढ़ाया है।

संसदीय क्षेत्र खंडवा के जनप्रतिनिधियों ने भी इस उपलब्धि पर वीडियो कॉल के माध्यम से रूपल को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि यह सफलता रूपल की कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प, लगन और परिवार के मार्गदर्शन का परिणाम है। उनकी उपलब्धि पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
समाजसेवी व प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि रूपल के लिए यह सफलता एक लंबी मेहनत और संघर्ष का परिणाम है। रूपल के पिता धनंजय जायसवाल सिविल इंजीनियर हैं और उन्होंने अपनी बेटी के सपनों को पंख देने के लिए हर संभव सहयोग किया। रूपल ने वर्ष 2023 में वकालत की पढ़ाई पूरी करने के बाद मुंबई में नौकरी की, लेकिन मन में आईएएस बनने का सपना लगातार उन्हें पुकारता रहा।
इसी जुनून के साथ उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। वर्ष 2023 में पहला प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। रूपल ने हार नहीं मानी और 2024 में दोबारा परीक्षा दी, जिसमें उन्हें 512वीं रैंक प्राप्त हुई। हालांकि यह भी एक बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन रूपल के सपने इससे भी बड़े थे। वह कलेक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहती थीं।

यही संकल्प उन्हें तीसरे प्रयास तक ले गया और वर्ष 2025 में उन्होंने 43वीं रैंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने कठिनाइयाँ ज्यादा देर टिक नहीं पातीं।
रूपल ने बताया कि इंटरव्यू के दौरान उनसे खंडवा और किशोर कुमार से जुड़े कई सवाल पूछे गए। उनसे पूछा गया कि खंडवा को किशोर कुमार की नगरी क्यों कहा जाता है और यहां उनके स्मारक का क्या महत्व है। रूपल ने बड़े आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया कि महान गायक किशोर कुमार ने खंडवा में जन्म लेकर इस शहर का नाम देशभर में रोशन किया है और यही उनकी पहचान है।
इस उपलब्धि की खबर जैसे ही परिवार और शहरवासियों को मिली, पूरे घर और मोहल्ले में खुशी का माहौल छा गया। ढोल-ढमाकों और आतिशबाजी के साथ इस सफलता का स्वागत किया गया। रिश्तेदारों, मित्रों और समाज के लोगों ने रूपल का सम्मान कर उन्हें बधाई दी।
रूपल की सफलता की एक खास बात यह भी है कि उन्होंने बिना किसी बड़ी ऑफलाइन कोचिंग के, घर पर ही रोज करीब 15 घंटे पढ़ाई कर यह मुकाम हासिल किया। उनका कहना है कि सच्ची मेहनत और आत्मविश्वास ही सफलता का सबसे बड़ा मंत्र है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि ऑनलाइन कोचिंग या शॉर्टकट के चक्कर में पड़ने के बजाय खुद की मेहनत और अनुशासन पर भरोसा करें।
रूपल को संगीत का भी शौक है। उनका कहना है कि जब इंटरव्यू में उनसे संगीत से जुड़ा सवाल पूछा गया तो उन्हें लगा कि अब चयन की राह आसान हो गई है।
चर्चा ….
कभी-कभी शहरों की पहचान सड़कों, इमारतों या योजनाओं से नहीं बल्कि वहां से निकलने वाली प्रतिभाओं से होती है। खंडवा की बेटी रूपल जायसवाल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अगर सपनों में सच्चाई हो और मेहनत में ईमानदारी, तो छोटे शहरों की गलियों से भी देश की सबसे बड़ी सेवाओं तक का रास्ता निकलता है। अब उम्मीद यही है कि जब रूपल प्रशासनिक सेवा में कदम रखेंगी, तो वे वही संवेदनशीलता और जज़्बा साथ लेकर जाएंगी, जिसकी झलक उनकी मेहनत में आज दिखाई दे रही है।
खंडवा की इस होनहार बेटी को उज्ज्वल भविष्य के लिए पुनः हार्दिक शुभकामनाएँ।















