“सीएम हेल्पलाइन का ताला, आठ दिन का तमाशा!”

“यह खंडवा है—जहाँ झूठ की बुनियाद पर ‘नंबर वन’ की इमारत खड़ी की जाती है,
और देश में जिले काग़ज़ों पर ‘नंबर वन’ बनते हैं, ज़मीनी सच आज भी कतार में खड़ा रहता है।”
चर्चा न्यूज़ खबर/विशेष लेखन:
खंडवा नगर निगम एक बार फिर अपनी ही खोली पर हुए अवैध क़ब्ज़े को हटाने में नाकाम साबित हुआ। रहवासी क्षेत्र में—हनुमान मंदिर से महज़ दस क़दम की दूरी पर, माखनलाल चतुर्वेदी स्कूल के सामने, जैन स्थानक के पास और आश्रम से लगी—झटका मटन की दुकान धड़ल्ले से चलती रही, और प्रशासन ‘कार्रवाई’ के नाम पर सिर्फ़ ताले की रस्म निभाता रहा।
सीएम हेल्पलाइन की शिकायत पर नगर निगम ने आठ दिन का ताला लगाकर फोटो खिंचवाई, समाधान दर्ज कराया और ग्रेडिंग सुधार कर वाहवाही लूट ली। ताला खुलते ही दुकान फिर चालू—यानी समस्या जस की तस, समाधान काग़ज़ों में पूरा। यह वही दुकान है जो निगम की ही खोली में अवैध क़ब्ज़े से चल रही थी, और जिसे हटाने का दावा बार-बार किया गया।
स्वच्छता में “नंबर वन”, कार्रवाई में भी “नंबर वन”—पर ज़मीन पर हकीकत उलट है। धार्मिक स्थलों, शैक्षणिक परिसर और घनी आबादी के बीच झटका मटन दुकान पर नियमों की धज्जियाँ उड़ती रहीं, और प्रशासन ने नाम मात्र की कार्रवाई से जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।
चर्चा न्यूज़ विशेष:
क्या सीएम हेल्पलाइन का मतलब सिर्फ़ ताला-खोल की औपचारिकता है? या फिर ग्रेडिंग सुधार के लिए समस्याओं को अस्थायी तौर पर ढक देना ही नया समाधान मॉडल बन गया है? अगर यही “नंबर वन” है, तो नियम-कानून की दूसरी पंक्ति कहाँ गई?
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