खंडवा में प्रोटोकॉल कागज़ों तक सीमित या अफसरशाही का अहंकार हावी?
‘सवा शेर’ की भावना या जानबूझकर अपमान—पिंकी वानखेड़े बनाम CEO निकिता मंडलोई
जहाँ मंच पर कुर्सियों का क्रम तय होता है, वहाँ लोकतंत्र की हैसियत भी परखी जाती है।
खंडवा में सवाल यह नहीं कि कौन बैठा, सवाल यह है कि किसे जानबूझकर नीचे बैठाया गया।

चर्चा न्यूज़ विशेष सुशील विधाणी
खंडवा में जनपद पंचायत भवन के भूमिपूजन कार्यक्रम ने अब यह साफ कर दिया है कि मामला केवल एक मंच-व्यवस्था की भूल नहीं, बल्कि प्रशासनिक मानसिकता, व्यक्तिगत पसंद–नापसंद और प्रोटोकॉल के खुले उल्लंघन से जुड़ा है। सवाल यह नहीं कि गलती हुई, सवाल यह है कि गलती कराई गई या सोच-समझकर की गई।
31 दिसंबर 2025 को आयोजित जनपद पंचायत खंडवा के नवीन भवन भूमिपूजन कार्यक्रम के आमंत्रण पत्र ने प्रशासनिक हलकों में भूचाल ला दिया। पत्र में सांसद को मुख्य अतिथि और विधायक को अध्यक्षता दी गई, जबकि राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती पिंकी सुदेश वानखेड़े को विशिष्ट अतिथि सूची में तीसरे क्रम पर रखा गया।
हैरानी की बात यह है कि यही क्रम मंच पर भी दोहराया गया—जो इस बात की ओर इशारा करता है कि यह कोई तकनीकी चूक नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित व्यवस्था थी।
जबकि जनपद पंचायत, जिला पंचायत के अधीन संस्था है और ऐसे कार्यक्रमों में अध्यक्षता का संवैधानिक अधिकार जिला पंचायत अध्यक्ष को ही होता है। इसके बावजूद उन्हें नीचे दिखाना अब महज़ लापरवाही नहीं, बल्कि पद और व्यक्ति—दोनों को नीचा दिखाने का प्रयास माना जा रहा है।
पिंकी वानखेड़े से बातचीत में यह भी सामने आया है कि उनकी नाराज़गी सिर्फ इस कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि प्रभारी CEO निकिता मंडलोई के व्यवहार में लंबे समय से एक ऐसी भावना झलकती रही है, जिसे वे “आप शेर में सवा शेर” वाली मानसिकता के रूप में देखती हैं।
अर्थात अधिकार और वर्चस्व को लेकर प्रतिस्पर्धात्मक सोच—जो किसी प्रशासनिक अधिकारी को शोभा नहीं देती।
उनका स्पष्ट कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी को प्रोटोकॉल और मर्यादा के भीतर रहकर निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का सम्मान करना चाहिए, लेकिन व्यवहार इसके उलट दिखाई देता है। चर्चा है कि जहाँ भी अवसर मिलता है, वहाँ नीचा दिखाने से परहेज नहीं किया जाता, और भूमिपूजन कार्यक्रम उसी मानसिकता की सार्वजनिक अभिव्यक्ति बन गया।
इसी कारण जिला पंचायत अध्यक्ष ने आयुक्त इंदौर संभाग और कलेक्टर खंडवा को कड़ा शिकायत पत्र भेजते हुए प्रभारी CEO निकिता मंडलोई पर जानबूझकर प्रोटोकॉल तोड़ने, संवैधानिक पद की गरिमा भंग करने और सार्वजनिक अपमान के गंभीर आरोप लगाए हैं।
पत्र में कारण बताओ नोटिस, अनुशासनात्मक कार्रवाई और भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति रोकने की मांग की गई है।
चर्चा यह भी है कि संबंधित अधिकारी पहले भी विवादों में रही हैं और उनके खिलाफ मुख्यमंत्री तक शिकायत की जा चुकी है। ऐसे में सवाल और गहरा हो जाता है—
क्या खंडवा में प्रोटोकॉल सिर्फ फाइलों की शोभा बनकर रह गया है?
या फिर प्रशासनिक पद का इस्तेमाल चुनिंदा जनप्रतिनिधियों को “सीख” देने के लिए किया जा रहा है?
अब खंडवा की राजनीति और प्रशासन—दोनों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि
क्या इस गंभीर प्रोटोकॉल उल्लंघन पर कार्रवाई होगी, या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा।
चर्चा न्यूज़ यही है कि यह नाराज़गी किसी एक मंच की नहीं, बल्कि बार-बार अपमानित किए जाने की भावना का परिणाम है—और यही भावना आज खंडवा की सियासी व प्रशासनिक चर्चाओं के केंद्र में है।
चल रही है चर्चा…















