नेताओं पर बने प्रकरणों की हो रही क्लोजिंग
ईयर क्लोजिंग में कानून भी अलर्ट
चालान के साथ राजनीति की फाइलें भी खुलीं, कोतवाली टीआई की नजर में सब “कैद”

चर्चा न्यूज़ विशेष चर्चा |
साल की क्लोजिंग में कानून सक्रिय, नेताओं के प्रकरण भी निपटान की कतार में
खंडवा में ईयर क्लोजिंग ने इस बार सिर्फ हिसाब-किताब नहीं बदला, बल्कि कानून की गति भी तेज कर दी है। सड़क पर चालान कट रहे हैं और थानों में वर्षों से सोए प्रकरण अचानक जाग गए हैं। चर्चा है कि कोतवाली टीआई की नजर में अब वे फाइलें भी “कैद” हो चुकी हैं, जिन पर अब तक समय और सुविधा दोनों भारी पड़ते रहे।
नेता हों या कार्यकर्ता, सत्तापक्ष हो या प्रतिपक्ष—ईयर क्लोजिंग के गणित में सब बराबर नजर आ रहे हैं। कोतवाली थाना इन दिनों शिकायत केंद्र से ज्यादा राजनीतिक प्रकरणों का लेखा-जोखा कार्यालय बन गया है। पुराने मामलों में चालान पेश कर समाधान की रफ्तार बढ़ा दी गई है, ताकि साल का हिसाब अधूरा न रह जाए।
पूर्व मंत्री के पुत्र सिलावट को पुतला दहन के दौरान ही गिरफ्तार कर महाराष्ट्र ले जाना हो, कांग्रेस से भाजपा में आए शराब व्यापारी पवार पर चल रहे प्रकरण हों, या नेता प्रतिपक्ष से जुड़े मामलों की लगातार बनती श्रृंखला—हर फाइल को एक-एक कर खंगाला जा रहा है। अब इस सूची में मशाल रैली के दौरान हुई भगदड़ पर दर्ज प्रकरण भी शामिल हो गया है, जो पहले औपचारिकता में सिमटा रहा, लेकिन अब अचानक प्राथमिकता बन गया।
इन दिनों कोतवाली में नेताओं की आवक-जावक बढ़ी हुई है। जिन प्रकरणों पर साल भर “देखेंगे” लिखा रहा, वे अब ईयर क्लोजिंग की स्याही से दोबारा लिखे जा रहे हैं। दायित्वधारी हों या सामान्य राजनीतिक चेहरे—सभी को अपने-अपने मामलों के समाधान के लिए पुलिस के सामने हाजिरी देनी पड़ रही है।
पुलिस की यह सक्रियता एक ओर कानून के समान व्यवहार का संदेश देती है,इ तो दूसरी ओर यह सवाल भी छोड़ जाती है कि क्या यह सख्ती पूरे साल चलेगी या फिर कैलेंडर बदलते ही फाइलें फिर से आराम फरमाने लगेंगी। फिलहाल चर्चा यही है कि इस बार ईयर क्लोजिंग में सिर्फ खाते नहीं, राजनीतिक प्रकरण भी पूरे किए जा रहे हैं।
चल रही है चर्चा……
















