कार्रवाई काबिल-ए-तारीफ़ है, पर सवाल सीधा है—
क्या यह सुरक्षा की चिंता है या साल बंद करने की जल्दबाज़ी?
दो दिन में वर्षों की समस्या सुलझ गई,
अब देखना यह है कि यह सक्रियता जनवरी तक जिएगी या दिसंबर में ही खत्म हो जाएगी।
–चर्चा न्यूज़ विशेष
खंडवा।सुशील विधाणी
रेलवे में आम दिनों में जहां फाइलें प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेनों की तरह खिसकती रहती हैं, वहीं साल के अंतिम पड़ाव पर अचानक आरपीएफ–जीआरपी रेलवे खंडवा को ऐसी फुल स्पीड मिली कि दो दिन में ही साल भर का हिसाब बराबर कर दिया गया। जिस समस्या पर यात्री महीनों से सवाल उठा रहे थे, उसका समाधान अचानक एयर क्लोजिंग मोड में कर यह साबित कर दिया गया कि इच्छा शक्ति के साथ कैलेंडर भी कार्रवाई का बड़ा हथियार बन सकता है।
चलती ट्रेन में पलक झपकते ही पर्स और मोबाइल उड़ाने वाला शातिर चोर अब खुद कानून की पकड़ में है। शुक्रवार को पंजाब मेल से यात्रा कर रही मुंबई निवासी हर्षा मलतानी ने इटारसी जीआरपी में शिकायत दर्ज कराई थी कि खंडवा क्षेत्र में उसका लेडीज पर्स चोरी हो गया। पर्स में 10 हजार रुपये नगद, 578 ग्राम चांदी की सिल्ली और मोबाइल फोन था—यानी चोर ने एक झटके में यात्रियों की नींद और भरोसा दोनों उड़ा दिए।
घटना खंडवा क्षेत्र की होने से मामला जैसे ही खंडवा जीआरपी तक पहुंचा, जीआरपी और आरपीएफ ने संयुक्त रूप से वह सक्रियता दिखाई जो आमतौर पर त्योहारी या सालाना रिपोर्टिंग के समय ही देखने को मिलती है। मुखबिर तंत्र अचानक पूरी तरह जागा और तीन पुलिया क्षेत्र से एक संदिग्ध युवक को बैग सहित दबोच लिया गया।
पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम आनंद पिता नारायण ठाकरे, उम्र 32 वर्ष, निवासी जसवाड़ी रोड माता चौक, थाना कोतवाली जिला खंडवा बताया। तलाशी में उसके बैग से 07 मोबाइल फोन, 578 ग्राम चांदी की सिल्ली और 5 हजार रुपये नगद बरामद हुए। कुल मिलाकर करीब 3 लाख 6 हजार रुपये का माल, जो यह बताने के लिए काफी है कि आरोपी का नेटवर्क ट्रेन से ज्यादा तेज़ चल रहा था।
सख्त पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि उसने 26 दिसंबर को ट्रेन नंबर 12137 पंजाब मेल एक्सप्रेस के कोच B-3, सीट नंबर 66 पर सो रही महिला का लेडीज पर्स चोरी किया था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर न्यायालय में पेश करते हुए रिमांड मांगा है, साथ ही यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि और मामलों के “डिब्बे” भी जुड़ सकते हैं।
लेकिन चर्चा यहीं खत्म नहीं होती।
रेलवे यात्रियों और आमजन के बीच यह सवाल भी तेज़ी से तैर रहा है कि—
क्या यह कार्रवाई यात्रियों की सुरक्षा को लेकर अचानक जागी संवेदनशीलता का नतीजा है,
या फिर साल का एयर क्लोज करने के लिए ही दो दिन में वह सब कर दिखाया गया, जो पूरे साल पेंडिंग प्लेटफॉर्म पर खड़ा था?
कार्रवाई काबिल-ए-तारीफ है, चोर सलाखों के पीछे है और माल बरामद हो चुका है,
पर असली परीक्षा यह होगी कि यह एक्सप्रेस सक्रियता जनवरी में भी पटरी पर रहेगी या फिर दिसंबर के साथ ही धीमी पड़ जाएगी।
चल रही है चर्चा.……















