“रिचार्ज खत्म, पत्रकार भी ऑफलाइन!”
“अब पत्रकारिता भी मंथली प्लान पर – 28 दिन वैलिडिटी, अनलिमिटेड पोस्टिंग”

चर्चा न्यूज़ विशेष सुशील विधाणी
नई टेक्नोलॉजी के दौर में पत्रकारिता ने भी करवट बदली है। अख़बार की स्याही अब मोबाइल स्क्रीन पर शिफ्ट हो चुकी है और अनुभव की जगह अब “रिचार्ज वैधता” ने ले ली है। सोशल मीडिया के तेज़ी से बढ़ते आयामों में अब एक नया प्रयोग सामने आया है, जहां पत्रकार को खबर लिखने से पहले अनुभव नहीं, बल्कि मंथली रिचार्ज कराना ज़रूरी हो गया है।
बताया जा रहा है कि ठीक मोबाइल रिचार्ज की तरह अब पत्रकारिता भी मंथली स्कीम पर चल रही है। पैसा दीजिए, आईडी लीजिए, तारीख डलवाइए और पूरे महीने “प्रतिष्ठित पत्रकार” बनकर सोशल मीडिया पर घूमिए। वैधता खत्म होते ही पत्रकार भी नेटवर्क से बाहर!
25 दिसंबर तक वैलिडिटी वाला एक ऐसा ही पत्रकारिता कार्ड सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसे दिखाकर एक युवक पूरे आत्मविश्वास से बता रहा है – “मैं इस पेपर का सोशल मीडिया प्रतिनिधि हूं।” फर्क बस इतना है कि पहले पहचान रिपोर्ट से बनती थी, अब स्क्रीनशॉट से बन रही है।
कभी पत्रकारिता में प्रवेश के लिए अनुभव, प्रशासनिक समझ, RNI की प्रक्रिया, MJ–BJ की पढ़ाई और वर्षों की मेहनत की ज़रूरत होती थी। अब हालात ऐसे हैं कि कल तक रील बनाने वाला आज “रिचार्ज पत्रकार” बनकर खबरों की दुनिया में ब्रेकिंग कर रहा है।
ऐसे में सवाल उठना लाज़मी है –
क्या अब पत्रकारिता भी कॉलिंग बैलेंस पर निर्भर हो गई है?
क्या अनुभव की जगह अब वैलिडिटी ने ले ली है?
अगर यही रफ्तार रही, तो वो दिन दूर नहीं जब खबर के नीचे लिखा होगा –
“नोट: इस पत्रकार की वैधता आज रात 12 बजे समाप्त हो जाएगी।”
— चर्चा न्यूज़ |
















