झूठे आवेदन से शुरू हुआ विवाद, अब सीएम हेल्पलाइन की भूमिका पर सवाल
नगर निगम की नाका उपयोग वाली खोली पर अवैध कब्जा, झटका मटन दुकान फिर चर्चा में

खंडवा | विशेष रिपोर्ट
नगर निगम की उस खोली, जो लोहड़ी नाका के उपयोग में थी, उस पर अवैध कब्जा कर झटका मटन की दुकान संचालित की जा रही थी। इसी अवैध कब्जे और खुले में मांस कटान को लेकर नगर निगम द्वारा की गई सील कार्रवाई के बाद मामला अब लगातार गहराता जा रहा है।
बताया जा रहा है कि हनुमान मंदिर, पंडित माखनलाल स्कूल, जैन स्थानक, गुरुद्वारा एवं अनाथ आश्रम से लगे रहवासी क्षेत्र नाका में स्थित नगर निगम की नाका उपयोग वाली खोली पर कई वर्षों कब्जा कर उसे झटका मटन दुकान में तब्दील कर दिया गया था। यह क्षेत्र घनी आबादी वाला है और धार्मिक व शैक्षणिक संस्थानों से घिरा होने के कारण लगातार आपत्तियों और शिकायतों का विषय बना हुआ था।

लगातार मिल रही शिकायतों के बाद नगर निगम ने 16 दिसंबर 2025, मंगलवार को मौके पर पहुंचकर ताला बंद एवं सील की कार्रवाई की थी। यह कार्रवाई निगम के रिकॉर्ड में दर्ज है और सीएम हेल्पलाइन पर समाधान के रूप में भी दर्शाई गई।
अवैध कब्जे को दबाने के लिए बदली कहानी?
आरोप है कि कार्रवाई के बाद खंडवा गुरु सिंह सभा द्वारा एक कथित भ्रामक आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसमें नगर निगम की नाका उपयोग वाली खोली पर हुए अवैध कब्जे के तथ्य छिपाए गए और उसे किसी अन्य गुरुद्वारा संपत्ति से जोड़कर दर्शाने का प्रयास किया गया।
संबंधित पक्ष का कहना है कि जिस स्थान पर झटका मटन दुकान चलाई जा रही थी, वह पूरी तरह नगर निगम की संपत्ति है, और वहां किसी भी प्रकार का निजी या धार्मिक स्वामित्व नहीं है। इसके बावजूद अवैध कब्जा कर लंबे समय से व्यवसाय किया जा रहा था।
समाधान के बाद फिर दुकान खोलने की तैयारी?
अब चर्चा यह है कि सीएम हेल्पलाइन पर समाधान दर्शाकर, उपायुक्त स्तर पर बातचीत के बाद उसी खोली में दोबारा झटका मटन दुकान शुरू कराने की कोशिशें की जा रही हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि जब अवैध कब्जे पर कार्रवाई कर ताला लगाया गया था, तो फिर उसी स्थान पर व्यवसाय की अनुमति किस आधार पर दी जा रही है?
“काग़ज़ों में मोहन सरकार की सख़्ती, ज़मीन पर कार्रवाई ऐसी मानो नियम खुद ही जीभ चिढ़ा रहे हों।”
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर निगम की नाका उपयोग वाली खोली पर अवैध कब्जा स्वयं में गंभीर अपराध है, और उस पर मांस दुकान चलाना स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामाजिक मर्यादाओं के खिलाफ है।
फिलहाल पूरे मामले को लेकर शहर में यह चर्चा तेज है कि क्या अवैध कब्जा, सीएम हेल्पलाइन और दबाव की राजनीति के आगे नियम कमजोर पड़ते जा रहे हैं?
यह कार्रवाई मोहन सरकार के कड़े नियम जिसमें मांस दुकान पर कार्रवाई को भी जीप चलती हुई दिख रही है
— चर्चा जारी है…















